आपदा प्रबंधन में एआई के इस्तेमाल के लिए कानूनी, नीतिगत ढांचे की जरूरत: यूएनडीआरआर अधिकारी
दिलीप
- 16 Feb 2026, 04:33 PM
- Updated: 04:33 PM
नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (यूएनडीआरआर) के एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आपदा प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकती है, खास तौर पर नुकसान कम करने में, लेकिन निवारक कार्रवाई के बारे में फैसले लेने वाले जमीनी स्तर के अधिकारियों के इस तरह की नयी प्रौद्योगिकियों पर भरोसा जताने के लिए कानूनी और नीतिगत ढांचे की जरूरत होगी।
यूएनडीआरआर के अंतर-सरकारी, अंतर-एजेंसी सहयोग एवं भागीदारी शाखा के प्रमुख सुजीत मोहंती ने यहां 'भारत मंडपम' में 'एआई इंपैक्ट समिट' के एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने आपदा प्रबंधन में एआई की पूर्वानुमान विश्लेषण क्षमता का इस्तेमाल करने की दिशा में बहुत काम किया है।
उन्होंने आपदाओं के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने और उसका विश्लेषण करने में एआई के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा, "यह पूरी प्रौद्योगिकी वास्तव में बहुत अच्छी तरह से और तेजी से विकसित हो रही है... आप ऐसे समाधान देख रहे हैं, जो पहले संभव नहीं थे...।"
हालांकि, मोहंती ने कहा, "मुझे लगता है कि इसके साथ-साथ हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि क्या एआई अंततः उन लोगों की वास्तव में मदद कर रहा है, जो लोगों के जीवन, उनकी आजीविका और संपत्ति की रक्षा के बारे में फैसले लेने के लिए जिम्मेदार हैं, ताकि इसमें (आपदाओं के कारण होने वाले नुकसान में) कमी सुनिश्चित की जा सके?"
मोहंती ने कहा कि समाधान पेश करने के मामले में एआई में बहुत संभावनाएं हैं और कई "शानदार ऐप लॉन्च किए जा रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "लेकिन आप इसका विस्तार कैसे करेंगे? आप इसे उन लोगों तक कैसे पहुंचाएंगे, जो निर्णय ले रहे हैं, जैसे कि जिले में बैठे जिलाधिकारी, जिन्हें यह तय करना है कि कब निकासी करनी है, कितने लोगों को निकालना है, कहां से निकालकर कहां ले जाना है और यह सब कैसे करना है?"
मोहंती ने कहा कि भले ही ऐप मौजूद हैं, लेकिन कोई जिलाधिकारी किसी भी ऐप पर जाकर संबंधित निर्णय नहीं ले सकता, जब तक कि इसके लिए कानूनी समर्थन और सहायक नीतियां मौजूद न हों।
उन्होंने कहा, "जब तक ऐसा नहीं किया जाता, ये शानदार ऐप 'डैशबोर्ड' के रूप में ही पड़े रहेंगे और जो लोग अहम फैसले ले रहे हैं, वे इनका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।"
हालांकि, मोहंती ने कहा कि आपदा प्रबंधन में एआई के इस्तेमाल के मामले में भारत ने काफी कुछ किया है। उन्होंने भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का उदाहरण दिया, जो पूर्वानुमान लगाने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहा है।
मोहंती ने कहा, "लेकिन कुछ ऐसे देश भी हैं, जो ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।" उन्होंने कहा कि भारत की किफायती एआई तकनीक को अन्य देशों में ले जाकर उनकी मदद की जा सकती है।
मोहंती ने इस बात को रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर आपदाओं के कारण हर साल लगभग 200 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान होता है।
सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष वीके शर्मा ने कहा कि भारत सरकार सहित कई सरकारों ने नयी प्रौद्योगिकियों के विकास के कारण होने वाले बदलावों को पहले ही स्वीकार कर लिया है।
उन्होंने कहा कि पहले राहत कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाता था, लेकिन अब नयी प्रौद्योगिकियों ने सटीक पूर्वानुमान को संभव बनाया है, जिससे नुकसान को कम करने में मदद मिली है।
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप
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