आरएसएस पर टिप्पणी को लेकर कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे और भाजपा नेताओं के बीच जुबानी जंग
मनीषा
- 16 Feb 2026, 01:54 PM
- Updated: 01:54 PM
बेंगलुरु, 16 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर टिप्पणी को लेकर कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के बीच सोमवार को तीखी बहस हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।
भाजपा नेता बेंगलुरु में खरगे द्वारा रविवार को की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।
खरगे ने आरएसएस पर धनशोधन में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए इसकी आय के स्रोत पर सवाल उठाया था।
उन्होंने कहा था, ''आरएसएस का 2,500 से अधिक संगठनों का नेटवर्क है… ये लोग उनसे पैसे लेते हैं। मैं बता रहा हूँ कि ये लोग धनशोधन में शामिल हैं।''
खरगे ने पूछा कि संगठन अपंजीकृत क्यों है और क्या यह ''कानून या संविधान से ऊपर'' है।
पलटवार करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मंत्री प्रियंक खरगे, पहले यह सुनिश्चित करें कि कांग्रेस पार्टी का पंजीकरण रद्द न हो, जिसकी अध्यक्षता आपके पिता कर रहे हैं और जो राजनीतिक मानचित्र से अपना अस्तित्व खोने के कगार पर है। उसके बाद ही अन्य के पंजीकरण की चिंता करें।''
क्षेत्रीय विकास के मुद्दे पर मंत्री को निशाना बनाते हुए विजयेंद्र ने कहा कि खरगे परिवार ने ''कल्याण-कर्नाटक को भारत के मानचित्र पर सबसे पिछड़े क्षेत्रों में से एक बनाने के अलावा कुछ भी योगदान नहीं दिया है।''
शिकारीपुरा से विधायक ने पूछा, ''मंत्री बनने के बाद प्रियंक खरगे ने कल्याण-कर्नाटक के विकास में क्या योगदान दिया है।''
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने भी मंत्री पर हमला करते हुए कहा, ''कल्याण- कर्नाटक की जनता के आशीर्वाद से चार दशकों तक सत्ता का आनंद लेते हुए, विकास के मामले में 'कल आना' का बोर्ड लगाकर बैठे रहने वाले, कल्याण-कर्नाटक की जनता के साथ विश्वासघात करने वाले लोग ज्यादा दिन नहीं टिकेंगे - हिसाब का दिन दूर नहीं है।''
अशोक ने कहा, ''आरएसएस को गाली देना आसमान पर थूकने जैसा है।''
सोमवार को जवाब देते हुए, खरगे ने अपनी टिप्पणियों का बचाव किया और कल्याण- कर्नाटक के मुद्दे पर भाजपा के आरोपों का खंडन किया।
उन्होंने कहा, ''कल्याण-कर्नाटक एक पिछड़ा क्षेत्र है। यदि आप यह समझ पाते कि इस क्षेत्रीय असंतुलन के ऐतिहासिक और भौगोलिक कारण हैं, तो भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार अनुच्छेद 371जे के तहत विशेष दर्जा देने से इनकार नहीं करती।''
खरगे ने पूछा, ''भाजपा में इस पिछड़े क्षेत्र को आगे बढ़ाने की इच्छाशक्ति की कमी क्यों है? आपकी सरकार के कार्यकाल में केकेआरडीबी का आवंटन क्यों कम हो गया?''
उन्होंने विजयेंद्र पर भी निशाना साधते हुए कहा, ''क्या आपके पिता बी.एस. येदियुरप्पा चार बार मुख्यमंत्री नहीं रहे थे? शिवमोग्गा का विकास सिंगापुर की तरह क्यों नहीं हुआ?''
खरगे ने कहा, ''सांप्रदायिकता रोधी कार्यबल का गठन रंगोली डिजाइन बनाने के लिए नहीं, बल्कि सांप्रदायिक संघर्षों को रोकने और शांति एवं सद्भाव बनाए रखने के लिए किया गया था।''
भाषा
नेत्रपाल मनीषा
मनीषा
1602 1354 बेंगलुरु