इंदौर पेयजल त्रासदी : दो साल की बच्ची की मौत से सदमे में परिवार, मां का रो रोकर बुरा हाल
जोहेब
- 13 Feb 2026, 09:38 PM
- Updated: 09:38 PM
इंदौर (मध्यप्रदेश), 13 फरवरी (भाषा) इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की वजह जान गंवाने वाली दो वर्षीय सिया प्रजापति के परिवार के लिए उसकी मौत के गम से उबरना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
सिया दूषित पेयजल की वजह से फैले उल्टी-दस्ते के प्रकोप के कारण जान गंवानी सबसे कम उम्र की रोगी थी।
घर में 'लड्डू' के नाम से पुकारी जाने वाली सिया का परिवार उसकी तस्वीरें और वीडियो देखकर भावुक हो उठता है जिनमें वह मजे से खेलती और खाना खाती नजर आती है।
परिजनों के मुताबिक सिया को कथित तौर पर दूषित पानी पीने से 27 दिसंबर को पहली बार दस्त की समस्या हुई थी और उसकी हालत इस कदर बिगड़ती चली गई कि दो अस्पतालों में इलाज के बाद भी जान नहीं बचाई जा सकी।
अधिकारियों ने बताया कि 'लिवर एब्सेस', निमोनिया और अन्य गंभीर समस्याओं से जूझने के बाद बच्ची ने शहर के शासकीय सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मंगलवार सुबह आखिरी सांस ली।
'लिवर एब्सेस' एक गंभीर संक्रमण है जिसमें मरीज के यकृत (लिवर) में मवाद भर जाता है।
सिया के पिता सूरज प्रजापति ने शुक्रवार को 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''कई मन्नतों के बाद जन्मी मेरी बेटी बेहद चंचल थी। हम घर में उसे प्यार से 'लड्डू' कहकर पुकारते थे। उसके जाने के बाद मेरी पत्नी का बुरा हाल है और वह रो-रोकर बेहोश हो रही है। हम बच्ची के साथ बिताए पल आखिर कैसे भूल सकते हैं?''
प्रजापति, भागीरथपुरा में किराये के घर में रहते हैं और पतलून सिलाई की इकाई संचालित करते हैं।
उन्होंने भावुक होते हुए याद किया कि जब वह रात को काम से घर लौटते थे, तो उनकी बेटी किस तरह दौड़कर तुरंत गोद में आ जाती थी।
प्रजापति के मुताबिक भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण उल्टी-दस्त का प्रकोप शुरू होने से पहले उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी।
उन्होंने बताया,''मेरी बेटी को 27 दिसंबर को दस्त की समस्या होने के बाद हमने उसे एक चिकित्सक को दिखाया था। इलाज के बाद मेरी बेटी की सेहत में सुधार हुआ था। हालांकि, कुछ दिन बाद उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई और हमें उसे सरकारी चाचा नेहरू चिकित्सालय में भर्ती कराना पड़ा।''
प्रजापति ने बताया कि तबीयत में सुधार नहीं होने पर चाचा नेहरू चिकित्सालय से उनकी बेटी को सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भेज दिया गया।
उन्होंने बताया,''मेरी बेटी के पेट पर सूजन थी। चिकित्सकों ने मुझे बताया कि शरीर में संक्रमण फैलने के कारण उसके लिवर में मवाद भर गया है।''
प्रजापति ने बताया कि गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती बेटी के इलाज के दौरान उन्हें केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) दस्तावेज जमा करके अपने परिवार का आयुष्मान कार्ड सक्रिय कराने में मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी और उन्होंने इसके लिए 'सीएम हेल्पलाइन' में दो बार शिकायत भी की।
उन्होंने बताया, ''मेरी बेटी की मौत के अगले दिन सीएम हेल्पलाइन के कॉल सेंटर से मुझे फोन आया और मुझसे कहा गया कि मेरा आयुष्मान कार्ड सक्रिय हो गया है, लिहाजा मैं अपनी शिकायत वापस ले लूं।"
प्रजापति ने कहा कि आयुष्मान कार्ड निष्क्रिय होने के बावजूद दोनों सरकारी अस्पतालों में उनकी बेटी का मुफ्त इलाज किया गया, हालांकि अस्पतालों के बाहर मिलने वाली कुछ दवाइयां उन्हें अपने खर्च पर खरीदनी पड़ीं।
उन्होंने कहा,''मुझे अब तक सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है। यह मदद मिल भी जाए, तो भी मेरी बेटी वापस नहीं आ सकती।''
स्थानीय लोगों ने भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण दिसंबर के आखिर में शुरू हुए उल्टी-दस्त के प्रकोप में अब तक कुल 35 लोगों की मौत का दावा किया है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग अदालत के आदेश पर दूषित पेयजल मामले की न्यायिक जांच कर रहा है।
राज्य सरकार ने इस प्रकोप के दौरान जान गंवाने वाले 20 से ज्यादा लोगों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है।
अधिकारियों का दावा है कि इनमें से कुछ लोगों की मौत दूसरी बीमारियों और अन्य कारणों से भी हुई है, लेकिन सभी मृतकों के परिवारों को मानवीय आधार पर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
भाषा हर्ष जोहेब
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