न्यायालय ने गाना विवाद में एआर रहमान से डागरवाणी परंपरा के योगदान को 'कुछ हद तक स्वीकार' करने को कहा
सुरेश
- 13 Feb 2026, 08:53 PM
- Updated: 08:53 PM
नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को संगीतकार ए आर रहमान और फिल्म ''पोन्नियिन सेल्वन 2'' के निर्माताओं से फिल्म के गीत ''वीरा राजा वीरा'' में डागरवाणी परंपरा के योगदान को ''कुछ हद तक स्वीकार'' करने को कहा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ध्रुपद गायक उस्ताद फैयाज वसीफुद्दीन डागर द्वारा सितंबर 2025 के दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि कनिष्ठ डागर बंधुओं द्वारा 'शिव स्तुति' के शास्त्रीय गायन की रचना का प्रथम दृष्टया कोई सबूत नहीं है।
फैयाजुद्दीन डागर के बेटे और जहीरुद्दीन डागर के भतीजे फैयाज वसीफुद्दीन डागर ने उच्च न्यायालय के समक्ष यह दलील दी थी कि कनिष्ठ डागर बंधुओं की सभी मूल रचनाओं, जिनमें 'शिव स्तुति' भी शामिल है, पर उनका कॉपीराइट है, जिसका गैरकानूनी रूप से उल्लंघन किया गया है।
पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान डागर के वकील से कहा, ''पहली प्रस्तुति का मतलब यह नहीं है कि रचनाकार आप ही हैं। आपका मामला पहली प्रस्तुति से यह निष्कर्ष निकालने पर आधारित है कि रचनाकार आप ही हैं। मुद्दा यह है कि क्या आप इसके रचयिता थे या आपने इसे डागर परंपरा से लिया और पहली बार गाया।''
इस पर वकील ने कहा, ''मैं एक विशेष रचना पर अधिकार का दावा कर रहा हूं। मेरा अधिकार रचना में निहित है। इसे मेरे पिता और भाई ने रचा था।''
इसके बाद पीठ ने डागर के वकील से पूछा कि क्या वे ''राग की मौलिकता'' का दावा कर रहे हैं, जिस पर उन्होंने कहा कि अधिकार रचना में है, न कि गायन शैली में।
उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि डागरवाणी परंपरा के योगदान को स्वीकार किया जाना चाहिए।
पीठ ने रहमान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी से कहा, ''धुन की मौलिकता निर्विवाद है। अगर इन घरानों ने शास्त्रीय संगीत में योगदान न दिया होता, तो क्या आपको लगता है कि ये आधुनिक गायक इसे गा पाते?''
सिंघवी ने कहा कि पहले के गायनों के दौरान कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ''लेकिन हमारे गायन के दौरान उन्होंने (डागर) आपत्ति जताई।''
पीठ ने कहा, ''देखिए, कुछ तो मान्यता मिलनी चाहिए। वे शास्त्रीय संगीत के पारंपरिक उपासक हैं। वह प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में नहीं हैं। वे सम्मान चाहते हैं।''
सिंघवी द्वारा अपने मुवक्किल से निर्देश लेने के लिए समय मांगे जाने के बाद, अदालत ने सुनवाई 20 फरवरी के लिए स्थगित कर दी।
भाषा शफीक सुरेश
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