साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए बैंक केवाईसी संबंधी नए नियमों की सिफारिश संभव
धीरज
- 13 Feb 2026, 08:38 PM
- Updated: 08:38 PM
(अभिषेक शुक्ला)
नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और 'आई4सी' साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के व्यापक प्रयासों के तहत सरकार को सिफारिश करने के लिए कई उपायों पर विचार कर रहे हैं, जिनमें बैंकों की केवाईसी प्रक्रियाओं को बायोमेट्रिक सत्यापन से जोड़ना और अंतरराष्ट्रीय मोबाइल रोमिंग सेवाओं को पासपोर्ट से जोड़ना शामिल है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि ये प्रस्ताव सीबीआई और गृह मंत्रालय के 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (आई4सी) द्वारा साइबर अपराधों से निपटने के लिए हाल ही में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन से सामने आए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि सम्मेलन में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, कानून प्रवर्तन एजेंसियां, भारतीय रिजर्व बैंक (आबीआई) सहित विभिन्न बैंकों के अधिकारी, इंटरपोल के अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में साइबर आपराधिक गिरोहों द्वारा भारतीय सिम कार्ड और फर्जी खातों के दुरुपयोग पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए थे।
सम्मेलन में साइबर धोखाधड़ी के तीन हथकंडों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें वित्तीय लेन-देन (अवैध खाते और धन शोधन), दूरसंचार (सिम या ई-सिम और डिजिटल बुनियादी ढांचे का दुरुपयोग) और मानव तस्करी (साइबर अपराध के लिए बंधक बनाना) शामिल है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया था कि साइबर अपराध का परिदृश्य वास्तव में चिंताजनक प्रतीत होता है, जिसमें हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति ऐसे अपराधों का शिकार हो रहा है और औसतन हर घंटे 100 लोग इन धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं।
शाह ने एजेंसियों से सम्मेलन में हुई चर्चाओं के आधार पर सरकार को सिफारिशें भेजने को भी कहा था।
सूत्रों के अनुसार, सरकार को दिए गए सुझाव संभवतः साइबर अपराध के इस विशेष पहलू - भारतीय सिम कार्ड के दुरुपयोग और फर्जी बैंक खातों - पर अंकुश लगाने पर केंद्रित होंगे।
सूत्रों ने बताया कि यह देखा गया है कि भारतीय सिम कार्ड सक्रिय किए जाते हैं, विदेशों में तस्करी करके भेजे जाते हैं और इन कार्ड से भारतीयों को कॉल किए जाते हैं, और उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट', ऋण और नौकरी के प्रस्तावों आदि जैसी विभिन्न चालों के माध्यम से साइबर अपराधियों को पैसे देने के लिए मजबूर किया जाता है।
सूत्रों ने बताया कि प्रमुख सुझावों में से चार मुख्य बिंदु कार्रवाई योग्य प्रस्तावों के रूप में सामने आए हैं, जिनमें पासपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय रोमिंग को जोड़ना, ग्राहक की प्रोफाइल के आधार पर अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सुविधा को विनियमित करना, फर्जी खातों पर अंकुश लगाने के लिए बैंकों की 'ग्राहक को जानें' (केवाईसी) प्रक्रिया में बायोमेट्रिक्स को शामिल करना और वीपीएन का उपयोग करके विदेश से भारतीय बैंक खातों तक पहुंच को विनियमित करना शामिल है।
भाषा शफीक धीरज
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