बांग्लादेश के चुनाव परिणामों को रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने 'अच्छी खबर' बताया
सुरेश
- 13 Feb 2026, 07:41 PM
- Updated: 07:41 PM
नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच 18 महीने से अधिक समय से जारी तनावपूर्ण संबंधों के बाद अब सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है, क्योंकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) पड़ोसी देश में हुए चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करने की ओर अग्रसर है।
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी ऐतिहासिक संसदीय चुनावों में शानदार जीत की ओर बढ़ रही है। चुनाव परिणामों का कई पूर्व भारतीय उच्चायुक्तों ने स्वागत किया और कहा कि यह बांग्लादेश, उसके लोगों और बांग्लादेश के मित्रों के लिए ''अच्छी खबर'' है।
बांग्लादेश में सेवा दे चुके पूर्व राजनयिक और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ सहित कई अन्य भी 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी की जीत को भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए एक अच्छा संकेत मान रहे हैं।
अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण शेख हसीना के 15 वर्षीय शासन का अंत हो गया था। इसके बाद से राजनीतिक शून्य, अस्थिरता और नाजुक सुरक्षा स्थिति के दौर से गुजरते हुए 12 फरवरी को हुए यह चुनाव काफी मायने रखता है। इस अवधि में अल्पसंख्यकों पर व्यापक हमले भी बढ़ गये।
बीएनपी दो दशकों के अंतराल के बाद सत्ता में वापसी करने जा रही है।
भाजपा सांसद एवं पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने चुनाव परिणाम को ''अच्छी खबर'' बताया और कहा कि नतीजों ने बांग्लादेश के लोगों की भावनाओं की ''पुष्टि'' की है।
उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ''यह न केवल बांग्लादेश और उसकी जनता के लिए, बल्कि बांग्लादेश के उन सभी मित्रों के लिए भी अच्छी खबर है जो उसके साथ अच्छे संबंधों में विश्वास रखते हैं। इसने उनकी भावनाओं को सही साबित किया है। हम सभी के लिए यह बहुत ही अच्छी खबर है।''
शृंगला बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं।
उन्होंने कहा, ''बांग्लादेश की जनता ने एक ऐसी पार्टी को वोट दिया है, जो राजनीतिक हितों का प्रतिनिधित्व करती है। यह 1971 की भावना में विश्वास रखती है, जबकि जमात-ए-इस्लामी 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के खिलाफ थी।''
पिछले 18 महीनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले की कई घटनाएं हुईं।
शृंगला ने कहा कि बीएनपी प्रमुख ने ''भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने और अपने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के इरादों के बारे में कुछ सकारात्मक बयान दिए हैं।''
उन्होंने कहा, ''हमारे सबसे निकटतम पड़ोसी, बांग्लादेश के साथ सहयोग दोनों पक्षों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी होगा। यह अच्छी खबर है और मुझे लगता है कि चुनाव परिणाम बांग्लादेश के लोगों की देश के विकास की इच्छा की पुष्टि करते हैं।''
हालांकि, पूर्व उच्चायुक्त ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि ''देश के सांप्रदायिक, कट्टरपंथी और इस्लामीकरण की ओर बढ़ने का खतरा टल गया है।''
इस बीच, यह बात अब और भी स्पष्ट होती जा रही है कि रहमान के प्रधानमंत्री बनने की पूरी संभावना है और वह नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की जगह लेंगे।
शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया था।
बांग्लादेश में 2003 से 2006 तक भारत की उच्चायुक्त रहीं वीणा सीकरी ने कहा कि बांग्लादेश की जनता ने जमात-ए-इस्लामी को ''खारिज'' कर दिया है।
उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि बीएनपी को दो-तिहाई बहुमत मिलना ''बांग्लादेश की जनता द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन की पुष्टि'' है।
मीडिया में आई खबरों के अनुसार, बीएनपी ने 300-सदस्यीय संसद में 151 से अधिक सीट हासिल कर ली हैं तथा उसके और भी सीट जीतने की संभावना है।
इस्लामाबाद के करीबी माने जाने वाली कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी लगभग 75 सीट पर आगे है या जीत हासिल करती नजर आ रही है।
भाषा सुभाष सुरेश
सुरेश
1302 1941 दिल्ली