खरगे ने रास में कार्यवाही से अपने भाषण के अंश हटाने पर उठाया सवाल
माधव
- 13 Feb 2026, 06:36 PM
- Updated: 06:36 PM
नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) राज्यसभा में शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने भाषण के कुछ हिस्से सदन की कार्यवाही से हटाए जाने पर असंतोष जताया।
शून्यकाल समाप्त होने पर जब सभापति सी पी राधाकृष्णन ने प्रश्नकाल शुरू करने को कहा तब खरगे ने अपनी बात कहने की अनुमति मांगी।
अनुमति मिलने पर खरगे ने कहा '' राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के समय मैंने शुरू में ही कह दिया था कि राष्ट्रपति का अभिभाषण राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को उठाने का एक बेहतरीन अवसर था लेकिन इस अभिभाषण में वह परिलक्षित नहीं होता। इसीलिए मैंने अपनी बात व्यापक रूप से रखी थी।''
उन्होंने कहा ''लेकिन राज्यसभा की वेबसाइट में मैंने देखा कि मेरे अभिभाषण का बड़ा हिस्सा, बिना कोई कारण बताए हटा दिया गया। मैंने अपने भाषण में तथ्यों सहित बात रखी है और सरकार की कुछ नीतियों की आलोचना की है जो नेता प्रतिपक्ष होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है। मुझे लगता है कि वे नीतियां भारतीय जनमानस पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं।''
खरगे ने कहा कि उन्होंने कुछ भी असंसदीय नहीं कहा था इसलिए उनके चार फरवरी के भाषण के हटाए गए अंशों को सदन की कार्यवाही में शामिल किया जाना चाहिए।
सभापति ने कहा कि आसन की ओर से फैसला नियमों के अनुरूप लिया गया है।
खरगे ने अपने पांच दशक लंबे संसदीय अनुभव का हवाला देते हुए कहा, ''मैं हमेशा भाषा की मर्यादा के प्रति सचेत और सजग रहा हूं, सदन की गरिमा, उसके नियमों और परंपराओं तथा पीठासीन अधिकारी के कर्तव्यों से अवगत रहा हूं। मुझे भली-भांति पता है कि कहां और क्या मुद्दा उठाया जा सकता है।''
उन्होंने कहा कि राज्यसभा की कार्यवाही से जुड़ा नियम 261 केवल विशिष्ट और सीमित परिस्थितियों में ही लागू होता है, इसलिए उनके भाषण के अंश को बहाल किया जाना चाहिए।
खरगे ने कहा, ''अतः मैं आपसे निवेदन करता हूं कि मेरे हटाए गए अंशों में न तो कोई असंसदीय या मानहानिकारक बात है और न ही वे नियम 261 का उल्लंघन करते हैं। मैंने जो कहा- वह स्पष्ट रूप से विचाराधीन विषय से संबंधित था। वह पूरी तरह से धन्यवाद प्रस्ताव के दायरे में था। अतः मेरा मानना है कि मेरे भाषण के इतने बड़े हिस्से को हटाना संविधान के अनुच्छेद 105(1) के तहत सांसदों को प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के लिए चिंता का विषय है और लोकतंत्र के खिलाफ है।''
खरगे के अनुरोध पर सभापति ने पहले कहा कि वह इस पर गौर करेंगे।
जब खरगे ने कहा कि वे हटाए गए अंशों को सार्वजनिक कर देंगे, तो अध्यक्ष ने कहा, ''ऐसा नहीं किया जा सकता। आप वरिष्ठ सदस्य हैं, आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? जो कुछ भी हटा दिया गया है, आप उसके बारे में नहीं कह सकते।''
हालांकि, खरगे ने जोर दिया, ''उनकी नीतियों, सरकार और मोदी जी की आलोचना करना मेरा अधिकार है।''
उन्होंने कहा कि अगर सभापति टिप्पणियां हटाते हैं, तो यह माना जाएगा कि वह प्रधानमंत्री का बचाव कर रहे हैं।
इस पर सभापति ने कहा, ''यह सही नहीं है। मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूं। यह लोकतांत्रिक नहीं है। आप आसन को निर्देश दे रहे हैं। यह सही नहीं है।''
इस पर सदन में मौजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि राज्यसभा की नियमावली के नियम 261 के तहत भाषण में बोले गए शब्द अगर असंसदीय हों तो उन्हें सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आसन ने अगर भाषण के किसी अंश को लेकर व्यवस्था दी है कि वह असंसदीय है तो उसे कार्यवाही से हटा दिया जाता है।
सीतारमण ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के भाषण के संबंध में यही हुआ है और सभी को आसन की व्यवस्था तथा नियमों का सम्मान करना चाहिए।
वित्त मंत्री ने कहा, ''विपक्ष के नेता यहां यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि अपने विवेक से उन्होंने कुछ भी अशोभनीय नहीं किया है, जबकि आपने सभापति के रूप में निर्णय लिया है।''
उन्होंने कहा, ''इस पर सवाल उठाना और यह कहना कि यह प्रधानमंत्री को बचाने के लिए किया जा रहा है, मुझे लगता है कि विपक्ष के नेता पद के लिए उचित नहीं है। मेरा मानना है कि आसन का सम्मान किया जाना चाहिए।''
जब सभापति ने सदस्यों से प्रश्नकाल जारी रखने के लिए कहा, तो कांग्रेस सदस्यों ने विरोध जारी रखा। लेकिन सभापति ने उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी और कहा, "आप आसन से प्रश्न नहीं कर सकते।''
भाषा अविनाश माधव
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