लैंबॉर्गिनी टक्कर मामले में आया नया मोड़ : 'मुआवजा' मिलने के बाद वादी ने वापस ली शिकायत
सं,सलीम नोमान रवि कांत
- 11 Feb 2026, 08:09 PM
- Updated: 08:09 PM
कानपुर, 11 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश में कानपुर के हाई-प्रोफाइल लैंबॉर्गिनी टक्कर मामले की जांच में बुधवार को उस समय एक नया मोड़ आ गया, जब मामले में मुकदमा दर्ज कराने वाले व्यक्ति ने 'मुआवजा' मिलने के बाद इस सिलसिले में आगे कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं करने की इच्छा जाहिर की।
एक अन्य घटनाक्रम में कार के कथित चालक मोहनलाल ने आज ही दावा किया कि जब कार ने पैदल चल रहे लोगों को टक्कर मारी, तो तंबाकू कारोबारी का बेटा शिवम मिश्रा नहीं बल्कि वह खुद गाड़ी चला रहा था।
शिवम के वकील धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि दुर्घटना के मामले में शिकायत दर्ज कराने वाले ई-रिक्शा चालक मोहम्मद तौफीक (18) ने कहा है कि उसका आरोपी पक्ष से समझौता हो गया है और अब वह इस मामले में चालक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहता है।
सिंह ने दावा किया कि दुर्घटना के समय मोहनलाल कार चला रहा था और उसने तौफीक के इलाज के खर्च और अन्य नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया है।
पुलिस के एक अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि तौफीक के पैर और हाथ में चोटें आई थीं। तौफीक को पहले उर्सुला हॉर्समैन मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया था और बाद में आगे की मेडिकल जांच तथा एक्स-रे के लिए स्वरूप नगर के एक निजी नर्सिंग होम में ले जाया गया। इसके बाद तौफीक को ग्वालटोली थाने में बुलाया गया, जहां ग्वालटोली के तत्कालीन थाना प्रभारी संतोष कुमार गौड़ की मौजूदगी में उसके और कथित कार चालक मोहनलाल के बीच एक लिखित समझौते पर दस्तखत हुए। इस दौरान तौफीक को कथित रूप से मुआवजे के तौर पर 20 हजार रुपये दिये गये।
समझौता दस्तावेज में कहा गया है कि यह समझौता बिना किसी दबाव के अपनी मर्जी से किया गया है और शिकायतकर्ता लैंबॉर्गिनी टक्कर मामले में उसके चालक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता।
हालांकि, एक और वरिष्ठ अधिकारी ने आरोप लगाया कि इस हाई-प्रोफाइल मामले के तुरंत बाद मामले को जल्दी खत्म करने के लिए 'उच्च अधिकारियों के काफी दबाव' में यह समझौता हुआ है।
इससे पहले, कथित कार चालक मोहनलाल ने यहां एक अदालत के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि हादसे से कुछ देर पहले शिवम को अचानक दौरा पड़ा था और उसे संभालने की कोशिश में वह कार पर नियंत्रण खो बैठा था।
उसने कहा, "जब यह हादसा हुआ तब मैं कार चला रहा था। अचानक शिवम को दौरा पड़ा और वह मेरे ऊपर गिर गया। मैं डर गया और मैंने उसे एक हाथ से संभालने की कोशिश की। कार एक तिपहिया वाहन से टकराई, डिवाइडर पर चढ़ी और रुक गई।"
मोहनलाल ने आगे दावा किया कि गाड़ी के ऑटोमैटिक लॉकिंग सिस्टम की वजह से वह तुरंत कार से बाहर नहीं निकल पाया।
मोहन ने कहा, "मैंने उसे चालक की सीट पर बैठाया और बाहर निकल गया। बाद में शीशा टूट गया।"
अधिकारियों ने बताया कि कार चालक के वकील ने संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण की अर्जी दी थी और अर्जी के बाद मोहनलाल बुधवार को आत्मसमर्पण करने के लिए अदालत में पेश हुआ।
हालांकि, ग्वालटोली पुलिस ने अदालत में जमा अपनी रिपोर्ट में उसे मामले में आरोपी नहीं बनाया।
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस के रुख को देखते हुए अदालत ने उसका आत्मसमर्पण स्वीकार करने से मना कर दिया।
लैंबॉर्गिनी एक इतालवी लग्जरी स्पोर्ट्स कार है जिसकी कीमत 10 करोड़ रुपये से ज़्यादा है। गत रविवार की अपराह्न करीब तीन बजे ग्वालटोली इलाके में लैंबॉर्गिनी कार वीआईपी रोड पर पैदल चलने वालों और गाड़ियों से टकरा गई। इस मामले में घायलों में से एक तौफीक ने बाद में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इससे पहले, शिवम के पिता एवं तंबाकू कारोबारी के. के. मिश्रा मंगलवार को अपना बयान दर्ज कराने के लिए ग्वालटोली थाने आए और चालक की बात का समर्थन किया।
उन्होंने कहा, "कार में मोहनलाल और शिवम थे और शिवम की जगह मोहन गाड़ी चला रहा था।"
हालांकि, बाद में के. के. मिश्रा अपने पहले के बयान से पलट गए और कहा कि उन्हें नहीं पता था कि उस समय कौन गाड़ी चला रहा था और मामले की जांच होनी चाहिए।
तंबाकू कारोबारी ने यह भी दावा किया कि कार में एक दिन पहले तकनीकी खराबी आ गई थी और मरम्मत के बाद उसे जांच के लिए ले जाया गया था। उनके मुताबिक, सिविल लाइंस से लौटते समय शिवम बेहोश होने लगा था।
मिश्रा ने कहा, "जब चालक ने उसे संभाला तो कार धीमी हो गई और एक ऑटोरिक्शा ने उसे टक्कर मार दी।"
उन्होंने कहा कि साथ चल रही कार में बैठे सुरक्षाकर्मियों ने उनके बेटे को बचाने के लिए खिड़की तोड़ दी।
परिवार का कहना है कि शिवम को मिर्गी की बीमारी है और उसका दिल्ली में इलाज चल रहा है। हालांकि, कानपुर की पुलिस ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि सीसीटीवी फुटेज, चश्मदीदों के बयान और अन्य सुबूत बताते हैं कि हादसे के समय शिवम मिश्रा ही गाड़ी चला रहा था।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन वीडियो का भी उल्लेख किया जिनमें टक्कर के तुरंत बाद कुछ लोग चालक की सीट से एक आदमी को खींचते हुए दिख रहे हैं जो शिवम लग रहा है।
पुलिस उपायुक्त (मध्य) अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जांच में शिवम की भूमिका 'साफ तौर पर साबित' हो गयी है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक शुरू में इस मामले में एक अनजान वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था लेकिन बाद में उसमें बदलाव करके शिवम को आरोपी बनाया गया। कार को फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।
भाषा
सं,सलीम नोमान रवि कांत
1102 2009 कानपुर