असम के मुख्यमंत्री ने गौरव गोगोई से 'रावलपिंडी' यात्रा को लेकर स्पष्टीकरण मांगा
रंजन
- 09 Feb 2026, 08:38 PM
- Updated: 08:38 PM
गुवाहाटी, नौ फरवरी (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई से पाकिस्तान के रावलपिंडी जिले की उनकी यात्रा को लेकर "स्पष्टीकरण" की सोमवार को मांग की और जोर देकर कहा कि उनके वीजा में "स्पष्ट रूप से केवल लाहौर, कराची और इस्लामाबाद की यात्रा की अनुमति थी।"
शर्मा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान के आव्रजन नियमों के तहत, वीजा द्वारा निर्धारित शहरों से बाहर यात्रा करना विशेष अनुमति के बिना प्रतिबंधित है।
इस आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए गोगोई ने कहा कि शर्मा "अपने ही झूठ के जाल में फंस रहे हैं।" लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता ने जोर देकर कहा कि राजनयिक पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए केंद्र को प्रस्तुत किए गए सामान्य पासपोर्ट में उनकी यात्रा के "सभी विवरण" मौजूद हैं।
शर्मा की यह टिप्पणी कांग्रेस सांसद की एक प्रेस वार्ता के बीच आई है। गोगोई ने कहा कि उन्होंने उचित अनुमति लेकर अपनी पत्नी के साथ पाकिस्तान के तक्षशिला का दौरा किया था।
शर्मा और गोगोई के बीच जुबानी जंग जारी है, जिसमें शर्मा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता और उनके परिवार के पाकिस्तान से संबंध हैं।
गोगोई ने पत्रकारों को बताया कि उनकी पत्नी 2013 में काम के सिलसिले में पाकिस्तान गई थीं और वह उसी साल दिसंबर में पड़ोसी देश की 10 दिवसीय यात्रा पर उनके साथ गए थे।
जब प्रेस वार्ता चल ही रही थी तभी शर्मा ने दावा किया कि गोगोई ने एक ऐसा खुलासा किया जिसकी उन्हें पहले से जानकारी नहीं थी।
उन्होंने कहा, "तक्षशिला इस्लामाबाद में नहीं, बल्कि पंजाब के रावलपिंडी जिले में स्थित है। यह तथ्य एक गंभीर और अपरिहार्य प्रश्न खड़ा करता है। यदि उनके पाकिस्तान वीजा में स्पष्ट रूप से केवल लाहौर, कराची और इस्लामाबाद की यात्रा की अनुमति थी, तो उन्होंने तक्षशिला की यात्रा कैसे की, जो इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र से बाहर और रावलपिंडी जिले के भीतर स्थित है?"
शर्मा ने कहा, "तो सवाल सीधा, तथ्यात्मक और जायज़ है: रावलपिंडी जिले के लिए वीजा मंजूरी न होने के बावजूद किसने उन्हें तक्षशिला जाने में मदद की?"
उन्होंने कहा कि यह प्रश्न इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय भी रावलपिंडी में ही स्थित है।
शर्मा ने कहा "इन तथ्यों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।"
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि गोगोई के पास रावलपिंडी जाने का वीजा नहीं था, जो एक "प्रतिबंधित, उच्च सुरक्षा वाला" जिला है।
शर्मा ने कहा, "हालात से स्पष्ट रूप से संकेत मिलता है कि यह यात्रा संस्थागत व्यवस्थाओं के माध्यम से सुगम बनाई गई थी, जिसके लिए मानक नागरिक वीजा अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती है।"
बाद में गोगोई ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि मुख्यमंत्री को यह जानने के लिए "गूगल मैप का अधिक सावधानीपूर्वक उपयोग करना चाहिए" कि तक्षशिला "इस्लामाबाद से एक दिन की यात्रा की दूरी पर है।"
उन्होंने कहा, "2014 में सांसद बनने के बाद मैंने राजनयिक पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए अपना मूल पासपोर्ट भारत सरकार को उपलब्ध कराया था। वह पासपोर्ट अब भी उनके (सरकार के) पास है और उसमें मेरी पाकिस्तान यात्रा का पूरा विवरण है।"
कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री अपने ही झूठों के जाल में फंस रहे हैं।
गोगोई ने कहा, "उन्होंने मुझे विदेशी एजेंट साबित करने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रहे। और एक झूठ को छुपाने के लिए उन्हें सौ झूठ बोलने पड़ते हैं।"
गोगोई ने कहा कि तक्षशिला भारतीय सभ्यता का एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है।
उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि मुझे एक प्राचीन भारतीय स्थल पर जाने का अवसर मिला।"
शर्मा ने रविवार को एक प्रेस वार्ता में आरोप लगाया था कि गोगोई, उनकी ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न और पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के बीच "गहरा संबंध" था और खुफिया ब्यूरो से जानकारी गुप्त रूप से पड़ोसी देश को दी जाती थी।
असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के उनके पाकिस्तानी कनेक्शन संबंधी आरोपों को 'बेहद बेतुका और झूठा' बता कर खारिज कर दिया।
इसके साथ ही गोगोई ने शर्मा की प्रेस कांफ्रेंस को 'सी-ग्रेड सिनेमा से भी बदतर' और 'सुपर फ्लॉप' करार दिया। शर्मा ने इसी प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता के खिलाफ यह आरोप लगाये थे ।
भाषा नोमान रंजन
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