राजनाथ ने साधु-संतों से सनातन ज्ञान को जनसामान्य के सामने रखने का आग्रह किया
रंजन
- 06 Feb 2026, 09:09 PM
- Updated: 09:09 PM
देहरादून, छह फरवरी (भाषा) साधु—संतों को 'सांस्कृतिक योद्धा' बताते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को उनसे सनातन ज्ञान को सरल और प्रासंगिक रूप से जनसामान्य के बीच प्रस्तुत करने तथा युवाओं से और अधिक संवाद बढ़ाने का आग्रह किया।
हरिद्वार में तीन दिवसीय संत सत्यमित्रानंद गिरि महाराज के समाधि मंदिर और मूर्ति अनावरण समारोह के आखिरी दिन अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति आज एक अदृश्य युद्ध के मैदान में है और इस पर कई प्रकार के हमले हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'हमारी युवा पीढ़ी अपने स्थानीय त्योहारों, भाषाओं और कलाओं से दूर होती जा रही है। ग्लोबल कल्चर की चकाचौंध हमारी सांस्कृतिक विविधता को लगातार धुंधला कर रही है। हमारे गौरवशाली इतिहास और हमारे महान विभूतियों को जानबूझकर विकृत किया जा रहा है। हमें अपने नायकों से विमुख करने का एक सुनियोजित प्रयास दशकों से चला आ रहा है ।'
ऐसी परिस्थिति में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर आगे बढ़ने को समय की मांग बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इसके लिए आप सभी संतों से योग्य और कोई नहीं है ।
उन्होंने कहा, 'आप सभी भारत के सांस्कृतिक योद्धा हैं । आप सभी संत और आचार्य इस पुनर्जागरण के केंद्र हैं । आज जब भौतिकता का अंधकार फैल रहा है, तब आपके मार्गदर्शन की आवश्यकता पहले से कहीं और अधिक बढ़ जाती है ।
उन्होंने कहा, 'आज जरूरत है कि हमारे संत राष्ट्र की युवा शक्ति से अपना संवाद और अधिक बढ़ाएं । हमारे संत आधुनिक माध्यमों का भी उपयोग करके सनातन ज्ञान को सरल और प्रासंगिक रूप से जनसामान्य के बीच प्रस्तुत करें ।'
रक्षा मंत्री ने संतों से सामाजिक सदभाव और राष्ट्रीय एकता के प्रबल प्रचारक बनने का भी आग्रह किया तथा कहा कि उन्हें यह कहते हुए गौरव की अनुभूति हो रही है कि बड़ी संख्या में संत समाज के लोग इस दायित्व का निर्वाह भी कर रहे हैं ।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य तभी सुरक्षित होता हे जब उसकी युवा पीढ़ी अपने अतीत और अपने मूल्यों को समझती हो और उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करती हो
सिंह ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा का अर्थ केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं की रक्षा तक ही सीमित नहीं है बल्कि एक राष्ट्र की सांस्कृतिक अस्मिता और सभ्यतागत चेतना की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है ।
उन्होंने कहा, 'एक राष्ट्र तब तक सुरक्षित नहीं कहा जा सकता जब तक कि उसकी सांस्कृतिक नींव, उसके मूल्य और उसकी पहचान सुरक्षित न हो । इतिहास गवाह है कि जिन राष्ट्रों ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को कमजोर होने दिया है, वह कितने भी सैन्य शक्ति संपन्न रहे हों, उनका अंतत: विघटन हुआ है ।'
भारतीय संस्कृति को 'सजीव, विकासशील और समावेशी शक्ति' बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत एकता है और अब हमें अब हमें राष्ट्रवाद से भी उपर उठकर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पुनरूत्थान की ओर भी देखना होगा ।
उन्होंने कहा, 'भारत की विशेषता यही है कि यहां राष्ट्र की कल्पना तलवार या सत्ता से नहीं बनी है, यहां राष्ट्र ऋषियों की कुटिया से निकला है, आश्रमों से निकला है, गुरू और शिष्य के संवाद से निकला है ।'
सिंह ने कहा कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कच्छ से लेकर कामरूप तक भारत यदि एक है तो सिर्फ इसलिए कि हमारे संतों ने सदियों के प्रयास से इस भूमि को जोड़े रखा है ।
उन्होंने इस संबंध में आदि शंकराचार्य से लेकर गुरू नानकदेव, कबीर से लेकर चैतन्य महाप्रभु का उदाहरण भी दिया ।
केंद्रीय मंत्री ने सनातन संस्कृति और राष्ट्र रक्षा को एक ही विषय बताते हुए कहा कि जैसे शरीर और प्राण हैं, वैसे ही सनातन और राष्ट्र एक दूसरे के पूरक हैं । उन्होंने कहा, ' सनातन संस्कृति हमें जीवन जीने का भाव देती है, वैसे ही राष्ट्र उस जीवन को सुरक्षित, संगठित और सशक्त रूप देता है ।'
कार्यक्रम में मौजूद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत सिर्फ एक भूभाग नहीं है और न ही किसी सत्ता की देन है बल्कि यह ऋषि परंपरा की शाश्वत चेतना है ।
उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपनी संस्कृति की उपेक्षा करता है, वह न तो अपने वर्तमान को सुदृढ़ कर पाता है और न भविष्य को ही सुरक्षित रख पाता है ।
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि को सनातन परंपरा का 'ध्वजवाहक' बताते हुए योगी ने कहा कि करुणा, मैत्री और राष्ट्रभक्ति उनके जीवन के मूल मूल्य थे। योगी ने 1982 में सत्यमित्रानंद गिरि महाराज द्वारा हरिद्वार में स्थापित भारत माता मंदिर को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया और कहा कि यह मंदिर जाति, क्षेत्र और भाषा की सीमाओं से ऊपर उठकर संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधता है।
केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि संत समाज से उन्हें सदैव प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है । इस आयोजन में शामिल होने को उन्होंने अपना सौभाग्य बताया ।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में आए सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने आध्यात्मिक साधना को समाज सेवा से जोड़कर एक विशिष्ट जीवन दर्शन प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति और विरासत को वैश्विक पहचान मिल रही है तथा उत्तराखंड विकास और विरासत के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है ।
भाषा दीप्ति रंजन
रंजन
0602 2109 देहरादून