स्कूलों के पाठ्यक्रम में डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को शामिल किया जाना चाहिए: मुर्मू
धीरज
- 06 Feb 2026, 09:00 PM
- Updated: 09:00 PM
(फोटो के साथ)
भुवनेश्वर, छह फरवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशभर में साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर शुक्रवार को चिंता व्यक्त की और लोगों में डिजिटल उपकरणों के बारे में जागरूकता पैदा करने और स्कूली पाठ्यक्रम में डिजिटल तथा वित्तीय साक्षरता को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुर्मू ने यहां ओडिशा सरकार द्वारा 'ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क' (जीएफटीएन) के सहयोग से आयोजित 'ब्लैक स्वान समिट' में कहा कि प्रौद्योगिकी में अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों और समाज के सभी वर्गों पर सकारात्मक प्रभाव डालने की अपार क्षमता है।
उन्होंने कहा कि हालांकि कभी-कभी इसका दुरुपयोग वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है, जिससे लोगों को अपनी जीवनभर की कमाई खोनी पड़ जाती है और उन्हें उच्च स्तर की मानसिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
राष्ट्रपति ने कहा, ''इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने और उन्हें सतर्क और सावधान रहने की आवश्यकता है।''
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए डिजिटल और वित्तीय साक्षरता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसे स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि कम उम्र में ही प्रौद्योगिकी के फायदे और नुकसान को समझा जा सके।
मुर्मू ने कहा कि केंद्र ने डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए विभिन्न उपाय किए हैं, जिनमें भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली और साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र की स्थापना शामिल है।
राष्ट्रपति ने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे लोगों के बीच डिजिटल और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करें।
उन्होंने कहा, ''हम ऐसे युग में जी रहे हैं जब प्रौद्योगिकी अभूतपूर्व गति से विकसित हो रही है। नये आविष्कार इतनी तेजी से सामने आते हैं कि हमारी प्रणालियां, कौशल और व्यावसायिक मॉडल अक्सर उनके साथ तालमेल बैठाने में संघर्ष करते हैं।
साथ ही, ये तीव्र प्रगति कई गंभीर चुनौतियां भी ला सकती है, जिनमें साइबर सुरक्षा खतरे, डीपफेक, गलत सूचना और प्रौद्योगिकी पर बढ़ती निर्भरता शामिल हैं।''
मुर्मू ने कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों का नवाचार और विकास पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले दशक में वित्तीय प्रणाली में एक प्रभावशाली क्रांति देखी है और किसानों, छोटे दुकानदारों और महिलाओं के बीच बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और डिजिटल भुगतान बहुत आम हो गए हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए, ''फिनटेक'' एक तकनीकी शब्द नहीं है बल्कि यह उनकी जीवनरेखा बन गया है।
राष्ट्रपति ने महिलाओं में वित्तीय साक्षरता के प्रसार पर जोर देते हुए कहा, ''महिलाएं एक महत्वपूर्ण वर्ग हैं जिन पर फिनटेक को बढ़ावा देने के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र को उन्हें न केवल अंतिम उपयोगकर्ता के रूप में बल्कि नेताओं, पेशेवरों और उद्यमियों के रूप में भी देखना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि प्रत्येक नये प्लेटफॉर्म, उत्पाद या नीति के लिए यह मूल्यांकन करना आवश्यक है कि क्या यह महिलाओं को डिजिटल और वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय भागीदार बनाती है।
मुर्मू ने उद्यमियों और नवप्रवर्तकों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि प्रौद्योगिकी सामाजिक न्याय और समावेशन का एक तरीका बने।
भाषा
देवेंद्र धीरज
धीरज
0602 2100 भुवनेश्वर