केरल में भूमि अधिग्रहण गंभीर समस्या : रेल मंत्री वैष्णव
सुभाष
- 06 Feb 2026, 08:20 PM
- Updated: 08:20 PM
नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि केरल में भूमि अधिग्रहण एक गंभीर समस्या है और विभिन्न परियोजनाओं के लिए अब तक केवल 14 प्रतिशत भूमि का ही अधिग्रहण हो सका है।
उन्होंने राज्य सरकार से रेल परियोजनाओं के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए सहयोग करने का आग्रह किया।
उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए वैष्णव ने कहा कि केंद्र की (नरेन्द्र) मोदी सरकार ने इस वर्ष केरल के लिए कुल 3,795 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जो पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए आवंटन से दस गुना अधिक है।
उन्होंने कहा, "भूमि अधिग्रहण एक गंभीर समस्या है और इसके लिए मिलने वाला सहयोग बहुत कम है। केवल 14 प्रतिशत भूमि का ही अधिग्रहण हो सका है। यदि राज्य सरकार सहयोग नहीं करेगी तो हम परियोजनाओं को आगे कैसे बढ़ाएंगे और रेलवे लाइन कैसे बिछाएंगे? कम से कम राज्य सरकार से इस प्रकार का सहयोग अपेक्षित है।"
रेल मंत्री ने कहा कि केरल में रेलवे के विकास के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। "जैसा कि हम जानते हैं, इस बजट में केरल में रेलवे के विकास के लिए रिकॉर्ड आवंटन किया गया है। यह आवंटन 3,795 करोड़ रुपये है, जो कांग्रेस सरकार के समय के आवंटन से दस गुना अधिक है।''
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, जिस तरह से परियोजनाएं शुरू की गयी हैं, उससे केरल में रेलवे लाइनों की क्षमता लगभग दोगुनी हो जाएगी।
हाई-स्पीड रेल के बारे में मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित पिछली 'सिल्वर लाइन' परियोजना का पर्यावरण पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा था। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि वह परियोजना व्यवहार्य भी नहीं थी। लेकिन, अगर राज्य सरकार चाहे तो हम उस हाई-स्पीड परियोजना पर पुनर्विचार कर सकते हैं।"
माकपा सदस्य जॉन ब्रिटास द्वारा दोबारा सवाल किए जाने पर, वैष्णव ने कहा, ''गेंद राज्य सरकार के पाले में है। राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण शुरू करना चाहिए। मैं सांसदों से भी अनुरोध करूंगा कि वे रेलवे परियोजनाओं में तेजी के लिए केंद्र सरकार का समर्थन करें।''
रेल मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अधिक यात्री गलियारा बनाएं और उनकी गति बढ़ाएं ताकि देश के 140 करोड़ लोगों को इसका लाभ मिल सके।
भाषा अविनाश सुभाष
सुभाष
0602 2020 संसद