राम मंदिर दान राशि 'चोरी' मामले में एसआईटी ने ट्रस्ट के अधिकारियों से पूछताछ की
जोहेब
- 17 Jun 2026, 07:17 PM
- Updated: 07:17 PM
अयोध्या (उप्र), 17 जून (भाषा) श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बुधवार को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से पूछताछ की। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जांच टीम ने दान राशि की गिनती करने और ट्रस्ट का रिकॉर्ड रखने वाले लोगों से भी पूछताछ की।
सूत्रों के अनुसार, राय और राव दोनों से दान की राशि, मंदिर के अंदर की व्यवस्थाओं और उससे जुड़े लोगों के बारे में पूछताछ की गई।
सूत्रों ने बताया कि एसआईटी के सदस्यों लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन ने राय और राव से अलग-अलग पूछताछ की। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों को दूर रखा गया।
सूत्रों के अनुसार सीसीटीवी फुटेज के अलावा टीम ने कई रिकॉर्ड की जांच की। उसने दान पेटियों का निरीक्षण किया, पेटियों की संख्या गिनी और पूरी प्रक्रिया के रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए।
एसआईटी प्रमुख पंत ने रामलला के गर्भगृह के सामने भूतल पर स्थित उस कमरे का निरीक्षण किया, जहां दान में मिले आभूषण व अन्य धातुएं रखी जाती हैं, और इसकी जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रस्ट के कर्मचारी कृष्णदेव तिवारी से पूछताछ की।
एसआईटी के सदस्य शाम तक राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद रहे।
अधिकारियों ने बताया कि एसआईटी को बताया गया कि ट्रस्ट, भारतीय स्टेट बैंक और संग्रह एजेंसी से जुड़े लगभग 40 कर्मचारी नकदी गिनने का काम करते हैं और दो पालियों में काम करते हैं।
तीन व्यक्तियों ने अलग-अलग थानों में शिकायत दर्ज कराई है, जिनमें मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है, लेकिन अब तक पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया।
इस बीच, मंदिर ट्रस्ट ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है।
मंगलवार को धर्म सेना के नेता संतोष दुबे और उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने इस मामले में राम जन्मभूमि थाने में शिकायत दर्ज कराई।
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने यहां संवाददाता सम्मेलन में सवाल किया कि इस मामले में प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई और कब उन लोगों के घरों पर बुलडोजर चलेगा जिन पर दान राशि की चोरी का आरोप है।
अयोध्या से समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय ने राम मंदिर फंड में कथित गबन की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की।
पांडेय ने कहा कि चूंकि मंदिर ट्रस्ट का गठन उच्चतम न्यायालय ने किया था, इसलिए उसे इस मामले की निगरानी करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से गठित एसआईटी की जांच इस मामले में उचित नहीं है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री ने यह सवाल भी किया कि इतने बड़े स्तर पर ईश्वर की संपत्ति के कथित दुरुपयोग के बावजूद अब तक प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई है।
उन्होंने यह भी मांग की कि मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग किया जाए और जब तक उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आरोपों का सामना कर रहे ट्रस्ट के सभी सदस्यों को मंदिर परिसर में प्रवेश से रोका जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान राशि की चोरी और वित्तीय कुप्रबंधन के आरोपों की जांच के लिए ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।
सरकार के अनुसार, ट्रस्ट ने तथ्यों का पता लगाने और राम मंदिर की छवि खराब करने के प्रयासों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मामला सात जून को सामने आया था, जब अखिलेश यादव ने खबरों का हवाला देते हुए दावा किया था कि राम मंदिर को दान के रूप में मिले करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने अदालत से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था।
भाषा सं राजेंद्र संतोष जोहेब
जोहेब
1706 1917 अयोध्या