‘जी राम जी विधेयक’ के जरिये सरकार ने गरीबों से रोजगार की ढाल छीनने का प्रयास किया: बादल
सुरेश देवेंद्र
- 17 Dec 2025, 10:27 PM
- Updated: 10:27 PM
नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने मनरेगा योजना को गरीबों के लिए ‘रोजगार की ढाल’ की संज्ञा देते हुए बुधवार को कहा कि सरकार ने इस कानून के स्थान पर ‘विकसित भारत- जी राम जी विधेयक’ लाकर गरीबों से यह ढाल छीनने का प्रयास किया है।
शिअद सांसद हरसिमरत कौर बादल ने लोकसभा में ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) में भले ही बहुत सारी खामियां थीं, लेकिन इसकी सबसे बड़ी ताकत यह थी कि यह कानून गरीब के लिए ‘रोजगार’ की ढाल की तरह थी।
उन्होंने कहा कि मनरेगा के अस्तित्व में रहने से गरीबों को इस बात का आश्वसन था कि उसे 100 दिन का रोजगार मिलेगा, लेकिन सरकार गरीब की वह ढाल भी छीनने की ओर अग्रसर है।
बादल ने विधेयक में केंद्र और राज्यों के बीच निधि में 60 बनाम 40 की हिस्सेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब जैसे राज्य के पास अपना हिस्सा देने के लिए राशि नहीं होगी, फिर क्या पंजाब में यह रोजगार योजना भी खत्म हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने भले ही साल में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी का प्रावधान किया हो, लेकिन ‘जी राम जी विधेयक’ के नये प्रावधानों से करोड़ों घरों में चूल्हे नहीं जलेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र ने संघीय ढांचा को कमजोर किया है, इसलिए इस प्रस्तावित काले कानून को वापस लिया जाना चाहिए।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के मियां अल्ताफ अहमद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने आयुष्मान भारत, प्रत्यक्ष नकद अंतरण (डीबीटी) और उज्ज्वला जैसी बेहतरीन योजनाएं चलाई थीं, लेकिन ‘जी राम जी विधेयक’ से सरकार की छवि प्रभावित होगी।
अहमद ने कहा कि वह शिवराज सिंह चौहान जैसे अच्छे मंत्री से मनरेगा में बदलाव की उम्मीद नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस मुल्क में सबसे बड़ा मसला बेरोजगारी का है और मनरेगा को बंद करके सरकार ने गरीबों का रोजगार छीना है।
उन्होंने इस विधेयक को वापस लेने की सरकार से मांग की।
कांग्रेस की ज्योत्स्ना चरणदास महंत ने सवाल किया कि क्या राम को सरकारी फाइलों में ही रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार केवल राम नाम का माला जप रही है, लेकिन उसके मन में कपट है।
समाजवादी पार्टी के हरेन्द्र सिंह मलिक ने कहा कि इस विधेयक से भाजपा का गरीब-विरोधी असली चेहरा सामने आ गया।
भाजपा के पीपी चौधरी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि संप्रग के शासनकाल में मनरेगा के तहत पैसों का दुरुपयोग होता था और मजदूरों को काम नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि संप्रग के शासनकाल में मनरेगा के लिए आवंटित राशि हर बार पूरी तरह खर्च नहीं हो पाती थी और शेष राशि राजनेताओं, नौकरशाहों और बिचौलियों द्वारा हड़प ली जाती थी।
चौधरी ने कहा कि महात्मा गांधी ने कभी नहीं सोचा था कि उनके नाम की योजना में भी इस तरह की लूटमार मचेगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने तकनीक आधारित प्रणाली शुरू करके इस योजना को मरने से बचा लिया।
भाजपा के माधवनेनी रघुनंदन राव ने कहा कि मोदी सरकार का इरादा लोगों के जीवन में बदलाव लाना है।
इसी पार्टी के ही राजकुमार चाहर ने कहा कि कांग्रेस ने गांधी जी का नाम चुरा तो लिया, लेकिन उनके वसूलों को आत्मसात नहीं किया।
आम आदमी पार्टी के गुरमीत सिंह मीत हेयर ने विधेयक को वापस लेने की सरकार से अपील की।
भाषा सुरेश