न्यायालय ने कैंसर के लिए अनिवार्य राष्ट्रीय अधिसूचना संबंधी याचिका पर केंद्र, राज्यों से जवाब मांगा
आशीष पवनेश
- 12 Dec 2025, 10:29 PM
- Updated: 10:29 PM
नयी दिल्ली, 12 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक प्रसिद्ध डॉक्टर द्वारा दायर जनहित याचिका पर केंद्र और सभी राज्यों से जवाब मांगा, जिसमें देश भर में कैंसर को "अधिसूचित करने योग्य बीमारी" घोषित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है ताकि शीघ्र निदान और रोगियों की उचित देखभाल सुनिश्चित की जा सके।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने अनुराग श्रीवास्तव की ओर से पेश हुए वकील गौरव कुमार बंसल की दलीलों पर पर गौर किया, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्यों द्वारा कैंसर को पूरे भारत में अधिसूचित बीमारी घोषित करने में विफलता के मुद्दे को उजागर किया गया।
याचिका में कहा गया है, "कैंसर को अधिसूचित रोग घोषित करने और देशभर में कैंसर मामलों की एक समान और अनिवार्य रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिवादी संख्या एक (केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय) के खिलाफ उपयुक्त आदेश जारी किया जाए।’’
याचिका में कहा गया है, "भारत में कैंसर के भयावह और बढ़ते बोझ के बावजूद, इसे अधिसूचित न किया जाना, संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत राज्य के संवैधानिक कर्तव्य का गंभीर उल्लंघन है, क्योंकि यह समान परिस्थितियों वाले नागरिकों को एक समान उपचार से वंचित करता है और स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन के उनके मौलिक अधिकार को कमजोर करता है।"
नयी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एम्स) में शल्य चिकित्सा विषयों के विभाग के पूर्व प्रमुख श्रीवास्तव ने केंद्र और सभी राज्यों के अलावा राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम और अनुसंधान संस्थान को भी जनहित याचिका में पक्ष बनाया है।
याचिका में कहा गया है कि अनिवार्य रिपोर्टिंग के अभाव के कारण खंडित आंकड़े, खराब निगरानी और भारत में बढ़ते कैंसर महामारी से निपटने में "नीतिगत गतिरोध" की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
याचिका में पीठ से आग्रह किया गया कि वह प्राधिकारों को कैंसर को राष्ट्रव्यापी अधिसूचित करने योग्य बीमारी घोषित करने और कोविड-19 महामारी के दौरान इस्तेमाल कोविन प्लेटफॉर्म के समान एक एकीकृत, वास्तविक समय डिजिटल कैंसर रजिस्ट्री स्थापित करने का निर्देश दे।
इसमें कहा गया है कि संविधान के तहत स्वास्थ्य मुख्य रूप से राज्य का विषय है, फिर भी बीमारियों को अधिसूचित करने का समवर्ती अधिकार केंद्र और राज्यों दोनों के पास है।
याचिका के अनुसार, एकसमान अधिसूचना प्रणाली के अभाव ने कैंसर की निगरानी में भारी असमानताएं पैदा कर दी हैं, जिसके परिणामस्वरूप निदान में देरी, उपचार की उच्च लागत और रोगियों के खराब परिणाम सामने आ रहे हैं।
इसमें कहा गया है कि कई राज्यों में रोगियों का निदान अक्सर उन्नत अवस्था में ही हो पाता है, जहां उपचार "कठिन, महंगा या असंभव" हो जाता है।
भाषा आशीष