कर्नाटक विधानसभा में घृणास्पद भाषण और घृणा अपराध रोकथाम विधेयक पेश, भाजपा ने विरोध किया
संतोष पारुल
- 10 Dec 2025, 10:36 PM
- Updated: 10:36 PM
बेलगावी, 10 दिसंबर (भाषा) कर्नाटक सरकार ने बुधवार को राज्य विधानसभा में भाजपा के कड़े विरोध के बीच कर्नाटक घृणास्पद भाषण और घृणा अपराध (रोकथाम) विधेयक पेश किया, जिसमें एक लाख रुपये तक के जुर्माने और 10 साल तक की कैद का प्रावधान किया गया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया कि इस कदम का उद्देश्य राजनीतिक विरोधियों की ‘‘अभिव्यक्ति की आजादी को छीनना’’ है।
राज्य मंत्रिमंडल ने चार दिसंबर को इस विधेयक को मंजूरी दी थी। कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने इस विधेयक को विधानसभा में पेश किया।
विधेयक के अनुसार, किसी भी प्रकार का ऐसा व्यक्तव्य—चाहे वह बोले गए शब्दों के माध्यम से हो, लिखित रूप में हो, इशारों या दृश्यमान प्रतीकों द्वारा हो, इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से हो या किसी अन्य तरीके से—जो सार्वजनिक रूप से किसी जीवित या मृत व्यक्ति, किसी वर्ग, समूह या समुदाय के प्रति चोट पहुंचाने, असहमति, शत्रुता, द्वेष या बुरे इरादे से दिया गया हो और किसी पक्षपाती हित की पूर्ति के उद्देश्य से हो, उसे घृणास्पद भाषण माना जाएगा।
धर्म, जाति, नस्ल या समुदाय, लिंग, लैंगिक पहचान, यौन अभिविन्यास, जन्म स्थान, निवास स्थान, भाषा, दिव्यांगता या जनजाति के आधार पर किसी भी प्रकार का पूर्वाग्रह भी घृणास्पद भाषण की श्रेणी में रखा गया है।
परमेश्वर ने सदन में विधेयक पेश करने की अनुमति मांगी और अध्यक्ष यूटी खादर ने इसे ध्वनि मत के लिए रखा, तो विपक्षी दल भाजपा के सदस्यों ने ‘नहीं’ के नारे लगाकर इसका विरोध किया।
हालांकि, सुनील कुमार जैसे कुछ भाजपा सदस्यों ने मत विभाजन की मांग की, फिर भी अध्यक्ष ने सदन में विधेयक पेश करने की प्रक्रिया जारी रखी।
विधानसभा में विधेयक पेश होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, ‘‘निश्चित रूप से घृणास्पद भाषण (रोकथाम) सरकार के एजेंडे का हिस्सा है। आप घृणास्पद भाषण को होने नहीं दे सकते। हमें राज्य में शांति, कानून-व्यवस्था बनाए रखनी है।’’
कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने कहा कि यह विधेयक सत्ताधारी दल की सनक के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘इसका उद्देश्य अभिव्यक्ति की आजादी को छीनना है, खासकर राजनीतिक विरोधियों की।”
विधान परिषद में भाजपा के नेता और नेता प्रतिपक्ष चालवाड़ी नारायणस्वामी ने भी आरोप लगाया कि यह विधेयक विपक्ष को निशाना बनाने के लिए है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह मुख्य रूप से विपक्ष को निशाना बनाने के लिए है। हमारे पास ऐसे उदाहरण हैं कि जब हम शिकायत करते हैं, तो न तो प्राथमिकी दर्ज की जाती है, न ही गिरफ्तारी होती है, लेकिन जब हम सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट करते हैं, तो हमें बिना किसी औपचारिक शिकायत के गिरफ्तार कर लिया जाता है।’’
पूर्वाग्रह आधारित हित में धर्म, जाति, समुदाय, लिंग, लैंगिक पहचान, यौन अभिविन्यास, जन्म स्थान, निवास स्थान, भाषा, दिव्यांगता या जनजाति के आधार पर पूर्वाग्रह शामिल हैं।
‘घृणा अपराध’ को घृणास्पद भाषण के संचार के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें इसे तैयार करना, प्रकाशित करना या प्रसारित करना शामिल है।
घृणास्पद भाषण के संचार को ऐसी अभिव्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है, जो सार्वजनिक रूप से मौखिक, मुद्रित, प्रकाशित या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों या अन्य साधनों के माध्यम से ऐसे घृणास्पद भाषण को व्यक्त करती हो।
विधेयक में प्रावधान है कि घृणा अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को कम से कम एक साल के कारावास की सजा दी जाएगी, जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
इसके अलावा, दोबारा या बार-बार किए गए अपराध के लिए सजा कम से कम दो साल होगी, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
भाषा संतोष