एसआईआर पिछले दरवाजे से की जा रही एनआरसी : ओवैसी
सुभाष अविनाश
- 10 Dec 2025, 09:30 PM
- Updated: 09:30 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को कहा कि निर्वाचन आयोग देश के उच्चतम न्यायालय और संसद से बड़ा नहीं है तथा एसआईआर कुछ और नहीं, बल्कि पिछले दरवाजे से की जा रही ‘एनआरसी’ है।
लोकसभा में, चुनाव सुधार पर चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) संसद द्वारा बनाये गए विधान का उल्लंघन करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह उच्चतम न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा ‘लाल बाबू हुसैन’ मामले में दिये गए फैसले का उल्लंघन करता है।’’
ओवैसी ने लोकसभा में मुस्लिम सांसदों की कम संख्या पर अफसोस जताया।
उन्होंने कहा कि डॉ भीमराव आंबेडकर ने बार-बार कहा था कि राजनीतिक सत्ता सामाजिक प्रगति की कुंजी है। एआईएमआईएम सांसद ने कहा, ‘‘यहां केवल चार प्रतिशत मुसलमान हैं। सत्तारूढ़ पार्टी में कोई मुस्लिम सदस्य नहीं है।’’
ओवैसी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ‘‘मुसलमान यहां नहीं हैं, धर्मनिरपेक्ष पार्टियों में उनका प्रतिनिधित्व नहीं है। उदाहरण के लिए, अगर वायनाड जैसी मुस्लिम बहुल सीट से गैर-मुस्लिम चुने जा सकते हैं, तो रायबरेली, अमेठी और इटावा से मुस्लिम चुने जा सकते हैं।’’
कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाद्रा और राहुल गांधी क्रमशः वायनाड और रायबरेली से लोकसभा सदस्य हैं, जबकि इटावा सपा का गढ़ रहा है।
ओवैसी ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग मतदाताओं पर अपनी नागरिकता साबित करने का भार डाल रहा है और ‘‘यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1960 में इस सदन द्वारा पारित किये गए निर्वाचक नियमों तथा लाल बाबू हुसैन मामले में शीर्ष अदालत के फैसले का उल्लंघन है।’’
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग, देश के उच्चतम न्यायालय और संसद से बड़ा नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ‘फॉर्म 6’ नियम संसद ने पारित किया है लेकिन निर्वाचन आयोग इस सदन द्वारा पारित किये गए कानून की शुचिता को तार-तार कर रहा है।
ओवैसी ने एसआईआर का विरोध करते हुए दावा किया कि यह धर्म के नाम पर लोगों को मताधिकार से वंचित करने की कवायद है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं एसआईआर का विरोध करता हूं क्योंकि यह पिछले दरवाजे से राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) तैयार करने जैसा है।’’
ओवैसी ने कहा कि वह सत्तारूढ़ भाजपा से आग्रह करते हैं कि देश में जर्मनी जैसी संसदीय व्यवस्था अपनाई जाए।
उन्होंने यह भी कहा, ‘‘हमें आम सहमति बनाकर वोट के अधिकार को मूल अधिकार बनाना चाहिए।’’
भाषा सुभाष