रास में उठे जल प्रदूषण, नक्सलवाद, परीक्षा केंद्र, सड़क हादसों से संबंधित मुद्दे
मनीषा अविनाश
- 10 Dec 2025, 03:06 PM
- Updated: 03:06 PM
नयी दिल्ली, दस दिसंबर (भाषा) जल प्रदूषण को एक गंभीर समस्या बताते हुए बुधवार को राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी सदस्य सुभाष बराला ने मांग की कि जल के शुद्धिकरण के लिए नियम बनाएं जाएं जिनका कठोरता से पालन हो और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्वयं इसकी निगरानी करे।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए बराला ने कहा ‘‘जीवन के लिए जल बेहद जरूरी है। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गंभीरता से काम कर रहे और उन्होंने हर घर नल से जल योजना शुरू की है ताकि लोगों को नल के जरिये, पीने का शुद्ध पानी मिल सके।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जल की प्रकृति ऐसी है कि उसमें तत्व आसानी से घुल सकते हैं। उद्योगों की अशुद्धियां जल में आसानी से घुल जाती हैं। उद्योगों से निकलने वाला दूषित जल बिना शोधन के ही नदियों, नालों में छोड़ दिया जाता है। यह पानी रिस कर जमीन में जाता है और मिट्टी पर प्रतिकूल असर डालता है। बाद में हम इसी जल को ट्यूबवेल आदि के माध्यम से निकालते हैं।’’
बराला ने कहा कि यह जल मनुष्य और पशुओं के पीने योग्य नहीं रहता और अगर पशु यह पानी पियें तो उनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है, साथ ही उनका दूध भी प्रभावित होता है।
उन्होंने मांग की कि जल के शुद्धिकरण के लिए नियम बनाएं जाएं और उनका कठोरता से पालन हो तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्वयं इसकी निगरानी करे।
इसी पार्टी के दीपक प्रकाश ने नक्सलवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गृह मंत्री ने इस समस्या के सफाये के लिए जो कदम उठाए हैं, वे सराहनीय हैं और अब उनका परिणाम सामने नजर आ रहा है।
उन्होंने कहा ‘‘पहले नक्सलवाद की समस्या 136 जिलों में थी लेकिन आज यह केवल छह जिलों तक सिमट गयी और 2026 तक इसे भी समाप्त करने का संकल्प है।’’
प्रकाश ने कहा कि वह झारखंड से आते हैं और उन्हें याद है कि राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में सूर्यास्त के बाद सड़कें वीरान हो जाती थीं लेकिन आज वहां अमन एवं शांति है। ‘‘पहले 365 दिन में से करीब 250 दिन आर्थिक नाकेबंदी होती थी, देश को गहरा आर्थिक नुकसान होता था। आज ऐसा नहीं है। पहले चुनाव बहिष्कार होता था, चाहे पंचायत चुनाव हो, विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव। ’’
उन्होंने कहा कि आज नक्सलवाद अंतिम सांसें गिन रहा है और जल्द ही यह पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उन्होंने मांग की कि नक्सलियों का किसी भी तरह से महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए और न ही उनके समर्थन में किसी तरह का जुलूस निकाला जाना चाहिए।
भाजपा के ही अजीत माधवराव गोपछड़े ने महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के कुछ गांवों में तेलंगाना के श्रीराम सागर से पानी छोड़े जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा ‘‘यह मानव निर्मित आपदा है। तेलंगाना के श्रीराम सागर से बिना चेतावनी के पानी छोड़ दिया जाता है जिससे गांवों में बाढ़ आ जाती है और जान-माल का नुकसान होता है।’’
गोपछड़े ने मांग की कि प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया जाए और अंतरराज्यीय जल प्रबंधन आयोग से समन्वय कर इस समस्या के समाधान के प्रयास किए जाएं।
भाजपा की संगीता बलवंत ने कहा कि कई कार्यालयों में सामंतवादी मानसिकता आज भी बरकरार है जिनका खामियाजा वे नागरिक भुगतते है जिन्हें सेवा देने के लिए ये कार्यालय बनाए गए हैं।
उन्होंने कहा ‘‘ इसे दूर किया जाना चाहिए। कार्य प्रणाली में विनम्रता, जवाबदेही हो और नागरिकों के प्रति सेवा के भाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’’
भाजपा की सुमित्रा वाल्मीक ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए केंद्र दूर-दूर होने का मुद्दा उठाया और कहा कि प्रतिभागी का वह कीमती समय परीक्षा केंद्र तक जाने के लिए यात्रा करने और अपने ठहरने की व्यवस्था करने में चला जाता है, जिस समय उसे पढ़ाई करनी चाहिए।
उन्होंने मांग की ‘‘फॉर्म भरने की प्रक्रिया जब ऑनलाइन कर दी गई है तो परीक्षा की प्रक्रिया ऐसी क्यों नहीं बन सकती। हर ब्लॉक में एक डिजिटल केंद्र बनाया जाए जिसे परीक्षा से संबद्ध किया जाए।’’
तृणमूल कांग्रेस के नदीमुल हक ने सूचना का अधिकार अधिनियम से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए सरकार पर इस अधिनियम को कमजोर करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा ‘‘सितंबर 2025 से मुख्य सूचना आयुक्त ही नहीं है। इसकी वेबसाइट अक्सर क्रैश हो जाती है। उम्मीद पोर्टल भी उम्मीद पर खरा नहीं उतरा। रिक्त पदों को तत्काल भरें। यही हाल रहा तो पारदर्शिता खत्म हो जाएगी।’’
भाजपा के डॉ सुमेर सिंह सोलंकी ने मध्यप्रदेश के निमाड़ में सेंधवा के पास बिजासन में दुर्घटनाओं को देखते हुए इनकी रोकथाम के उपाय करने की मांग की।
समाजवादी पार्टी की जया बच्चन ने सड़क दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि घायलों को विभिन्न कारणों से अस्पताल ले जाने में देर हो जाती है जिससे उनकी जान चली जाती है।
उन्होंने कहा कि राजमार्गों पर घायलों के लिए समर्पित इमरजेंसी लेन नहीं है। ‘‘दुर्घटना के बाद लोग मदद करने से बचते हैं। एंबुलेन्स पहुंचने में देर होती है। समीप में ट्रामा सेंटर नहीं होते।’’
जया ने मांग की कि राजमार्गों पर घायलों के लिए समर्पित इमरजेंसी लेन बनाई जाए, एंबुलेन्स समय पर पहुंचे और जरूरत को देखते हुए ‘ग्रीन कॉरीडोर’ बनाया जाए।
भाषा मनीषा