बिहार में एकतरफा जनादेश अप्रत्याशित, लेकिन यह जीत नीतीश कुमार की: सुप्रिया सुले
पारुल नरेश
- 14 Nov 2025, 07:09 PM
- Updated: 07:09 PM
मुंबई, 14 नवंबर (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-एसपी) नेता सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को कहा कि बिहार में “एकतरफा जनादेश” राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सहित सभी के लिए आश्चर्यजनक है, लेकिन इस जीत का श्रेय निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जाता है।
सुले ने मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “एक मजबूत लोकतंत्र में जीत और हार प्रक्रिया का हिस्सा हैं। मैं नीतीश कुमार को मिले जनादेश के लिए तहे दिल से बधाई देती हूं।”
उन्होंने स्वीकार किया कि इस बार राजग का प्रदर्शन विपक्षी गठबंधन से बेहतर रहा।
सुले ने कहा, “बिहार की जनता ने एक बार फिर नीतीश कुमार में भरोसा जताया है। यह मौजूदा आंकड़ों से स्पष्ट है।”
उन्होंने जीत का श्रेय मुख्य रूप से बिहार के निवर्तमान मुख्यमंत्री को देते हुए कहा कि नीतीश ने पूरे चुनाव अभियान का नेतृत्व किया था।
सुले ने कहा, “कई सर्वेक्षणों में कहा गया था कि बिहार चुनाव कठिन होगा। चुनाव कवर करने वाले संवाददाताओं और प्रचार अभियान में शामिल कई कार्यकर्ताओं ने मुझे बताया कि बिहार के लोगों के मन में नीतीश कुमार के लिए जबरदस्त सम्मान और प्यार है।”
उन्होंने कहा, “कल भी जब मैं दिल्ली में थी, तो चर्चाओं से लग रहा था कि बिहार चुनाव कठिन होगा। किसी को भी इतने बड़े एकतरफा जनादेश की उम्मीद नहीं थी - जीतने वालों को भी नहीं। इस बार, हमें स्वीकार करना होगा कि यह जीत नीतीश कुमार की है।”
सुले ने कहा कि नीतीश की ओर से पिछले तीन महीनों में लागू की गई विभिन्न योजनाओं का चुनाव नतीजों पर प्रभाव पड़ा होगा।
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े सवालों पर सुले ने कहा कि उन्होंने अपने बारामती लोकसभा क्षेत्र में ही लगातार कई मामले उठाए हैं।
उन्होंने कहा, “मीडिया ने भी लोगों के सामने वास्तविक स्थिति पेश की है। यहां तक कि भाजपा के साथ सत्ता साझा करने वाले सहयोगियों ने भी ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाए हैं।”
यह पूछे जाने पर कि क्या बिहार चुनाव के नतीजे महाराष्ट्र में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को प्रभावित करेंगे, सुले ने कहा, “बिहार में राज्य के विधानसभा चुनाव हुए। स्थानीय निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दों - सड़क, पानी, बिजली - पर ज्यादा जोर दिया जाता है। ये स्थानीय मुद्दे ऐसे चुनावों में महत्वपूर्ण होते हैं। इसीलिए कई जगहों पर स्थानीय गठबंधन बन रहे हैं।”
भाषा पारुल