हरिवंश ने पूर्वोत्तर को भारत के विकास के लिए अहम बताया
संतोष अविनाश
- 10 Nov 2025, 06:56 PM
- Updated: 06:56 PM
कोहिमा, 10 नवंबर (भाषा) राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने सोमवार को भारत की विकास यात्रा में पूर्वोत्तर की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया।
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र जोन तीन (जिसमें आठ पूर्वोत्तर राज्य शामिल हैं) के 22वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए हरिवंश ने कहा कि विधायिका लोकतंत्र की आधारशिला है और इसे नीति और जनता के बीच सेतु का काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन का विषय ‘नीति, प्रगति और जनता: परिवर्तन के कारक के रूप में विधायिकाएं’ विकास को सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित करने की समकालीन चुनौती को दर्शाता है।
हरिवंश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है और प्रत्येक राज्य को अपनी प्राथमिकताओं को इस राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़कर योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रत्येक राज्य को अपने-अपने लक्ष्यों और प्राथमिकताओं को प्राप्त करना चाहिए, जो मिलकर भारत को इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेंगे।’’
उन्होंने पूर्वोत्तर की सामाजिक-आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सरकार के केंद्रित प्रयासों पर प्रकाश डाला तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस क्षेत्र से जुड़ी लगभग 70 यात्राओं और निरंतर मंत्रिस्तरीय बैठकों को भारत के विकास एजेंडे में इस क्षेत्र के केंद्रीय स्थान का प्रमाण बताया।
हरिवंश ने कहा, ‘‘भारत की चार प्रतिशत आबादी और आठ प्रतिशत क्षेत्रफल वाले पूर्वोत्तर ने दिखा दिया है कि एकाग्रता और लगन से क्या हासिल किया जा सकता है।’’
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के लिए बजटीय प्रावधानों में तेजी से वृद्धि हुई है और इसे 2014 के लगभग 24,500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष में 1.8 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, पीएमजीएसवाई के तहत 6,000 किलोमीटर नए राष्ट्रीय राजमार्ग और 45,000 किलोमीटर से अधिक लंबी ग्रामीण सड़कें पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इस साल के अंत तक पूर्वोत्तर का हर गांव 4जी सेवा से जुड़ जाएगा।’’
उन्होंने बताया कि अब शेष भारत के साथ संपर्क के साथ-साथ आंतरिक ‘कनेक्टिविटी’ को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
भाषा संतोष