कोयला घोटाला: सीबीआई ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय की याचिका का विरोध किया
सुभाष दिलीप
- 05 Apr 2024, 08:33 PM
- Updated: 08:33 PM
नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय की उस याचिका का विरोध किया, जिसमें उन्होंने आगामी चुनाव लड़ने के लिए कोयला घोटाला मामले में अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।
राय को 1999 में झारखंड में एक कोयला ब्लॉक के आवंटन में अनियमितताओं से जुड़े मामले में तीन साल जेल की सजा सुनाई गई थी।
न्यायमूर्ति स्वर्णा कांत शर्मा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के वकील की दलीलें सुनने के बाद राय की अर्जी पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में (कोयला) राज्य मंत्री रहे राय (71) ने अदालत से उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अनुरोध किया, क्योंकि वह लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने दलील दी कि यह राष्ट्र या ओडिशा के लोगों की सेवा करने का उनके पास अंतिम मौका है।
सीबीआई की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आर एस चीमा और अधिवक्ता तरन्नुम चीमा ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के पैमाने को देखते हुए और कोयला ब्लॉक आवंटन मामलों से उपजे विषय के मद्देनजर दोषसिद्धि निलंबित नहीं की जा सकती।
सीबीआई के वकील ने कहा, ‘‘जिस अपराध के लिए आवेदक को दोषी करार दिया गया है वह नैतिक कदाचार से जुड़ा है। इसलिये, वह राहत पाने के हकदार नहीं हैं। आवेदक ने इस अदालत के समक्ष यह नहीं दर्शाया है कि यदि उनकी दोषसद्धि पर रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।’’
जांच एजेंसी ने कहा कि अपराध की गंभीरता और राय को सुनाई गई सजा के अपर्याप्त होने के मद्देनजर सीबीआई ने सजा बढ़ाने के लिए उच्च न्यायालय में अपील की, जिसने मई 2022 में इसे स्वीकार कर लिया था।
राय को एक निचली अदालत ने 26 अक्टूबर 2020 को तीन साल जेल की सजा सुनाई थी। अदालत ने उनपर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
अदालत ने उनके अलावा मंत्रालय के उस समय के वरिष्ठ अधिकारियों --प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्यानंद गौतम को भी तीन-तीन साल जेल की सजा सुनाई थी।
यह मामला 1999 में, झारखंड के गिरिडीह में ब्रह्मडीहा कोयला ब्लॉक का आवंटन कार्स्टन टेक्नोलॉजी टिमिटेड को करने से जुड़ा है।
भाषा सुभाष