गर्मी का कहर जारी, हीट स्ट्रोक और निर्जलीकरण से सतर्क रहने की जरूरत : विशेषज्ञ
नरेश
- 24 Apr 2026, 05:58 PM
- Updated: 05:58 PM
(फोटो के साथ रिपीट)
(राखी त्रिपाठी)
नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) देश के विभिन्न हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को शरीर में पानी की कमी और लू लगने जैसी समस्याओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
चिकित्सकों के अनुसार गर्मी का सामान्य प्रभाव त्वचा संबंधी परेशानियां लेकर आता है। इसके बाद सूजन, मांसपेशियों में ऐंठन, थकान और चक्कर जैसी समस्याएं भी सामने आने लगती है। लंबे समय तक धूप और गर्म वातावरण में रहने से लू लगने (हीटस्ट्रोक) का खतर बढ़ सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर नवल के. विक्रम ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि गर्मी के कारण शरीर में कई प्रकार की दिक्कतें आती हैं।
उन्होंने कहा, "गर्मी की वजह से सबसे पहले तो त्वचा संबंधी परेशानियां सामने आती हैं जिन्हें घमोरियां कहते हैं। अधिक पसीने के कारण खुजली और त्वचा संबंधी परेशानी होती है। कई लोगों को हाथ-पैरों में सूजन की शिकायत भी हो जाती है।"
प्रोफेसर विक्रम ने बताया कि अधिक पसीना निकलने के कारण शरीर में निर्जलीकरण की समस्या होती है और साथ ही सोडियम व इलेक्ट्रोलाइट का स्तर भी कम हो जाता है। इससे मांसपेशियों में ऐंठन (क्रैम्प) हो सकती है। यह स्थिति खासकर उन लोगों में अधिक देखने को मिलती है जो गर्मी में अधिक शारीरिक श्रम करते हैं, जैसे मजदूर, किसान और खिलाड़ी।
उन्होंने बताया,'' ज्यादा गर्मी बढ़ने पर व्यक्ति को अत्यधिक थकान, सिरदर्द, कमजोरी और उल्टी जैसा महसूस हो सकता है। गंभीर स्थिति में यह हीट स्ट्रोक का रूप ले सकता है, जो शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों जैसे मस्तिष्क, हृदय और किडनी को प्रभावित कर सकता है और जानलेवा भी हो सकता है।
लोगों में गर्मी से जुड़ी समस्याओं को लेकर अक्सर यह भ्रम रहता है कि हल्के लक्षणों में घरेलू उपाय पर्याप्त हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
प्रोफेसर नवल ने बताया, "गर्मी से जुड़ी अधिकतर समस्याओं का घर पर ही इलाज किया जा सकता है लेकिन अगर किसी व्यक्ति की मांसपेशियों में बहुत ज्यादा ऐंठन हो रही हो, अत्यधिक थकान महसूस हो रही हो, तेज चक्कर आ रहे हों, व्यवहार असामान्य हो और साथ ही शरीर का तापमान लगातार बढ़ रहा हो तो ये गंभीर संकेत हैं। ऐसी स्थिति में घर पर इलाज पर्याप्त नहीं है और तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है।"
राजधानी दिल्ली में मेट्रो से रोजाना दफ्तर आने-जाने वाले और एक निजी कंपनी में कार्यरत 32 वर्षीय नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि इस गर्मी ने रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल कर दी है।
उन्होंने कहा, "सुबह घर से निकलते ही ऐसा लगता है जैसे धूप शरीर को जला रही हो। मेट्रो तक पहुंचते-पहुंचते हालत खराब हो जाती है। समझ नहीं आता इस गर्मी से कैसे बचें, रोज ऑफिस जाना किसी चुनौती से कम नहीं है।''
चिकित्सकों के अनुसार गर्मी से बचाव के लिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना चाहिए। नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी जैसे प्राकृतिक पेय काफी फायदेमंद होते हैं।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि दोपहर 12 से तीन बजे के बीच सीधे धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए। हालांकि रेहड़ी-पटरी पर काम करने वालों की दिनचर्या का बड़ा हिस्सा ही तपती धूप के बीच सड़क किनारे बीतता है।
दिल्ली के मयूर विहार फेज एक इलाके में सड़क किनारे फल बेचने वाले ललित ने पीटीआई-भाषा से कहा, "गर्मी ने बेड़ा-गर्क कर रखा है। ठेले के चारों ओर कपड़ा लगाकर धूप से बचने की कोशिश करता हूं। पेट पालना है, फिर चाहे धूप हो या बारिश काम तो करना पड़ेगा।"
इस समस्या पर दिल्ली स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के 'सीनियर कंसल्टेंट - इंटरनल मेडिसिन', डॉ. संचयन रॉय ने पीटीआई-भाषा से कहा, "ज्यादातर समय धूप में रहकर काम करने वाले लोग हर 20-30 मिनट में पानी या तरल पदार्थ लें और तेज धूप से बचने के लिए छातों का इस्तेमाल करें, सिर को कपड़े, टोपी या गमछे से ढक कर रखना भी जरुरी है। अगर चक्कर, कमजोरी या ज्यादा पसीना आ रहा हो तो तुरंत काम रोककर आराम करें और पानी पिएं।"
भीषण गर्मी का असर हर किसी पर पड़ता है लेकिन बच्चे कुछ ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
स्कूल से घर लौट रहे छठी कक्षा के छात्र रेयांश सिन्हा को एक और ही चिंता सता रही है। उसका कहना था," मुझे डर लगता है कहीं आने वाले कुछ सालों में हालात ऐसे न हो जाएं कि घर के बाहर कदम रखने पर सूरज के ताप से शरीर ही जल जाए।"
डॉ. राय ने बताया कि बच्चों और बुजुर्गों में शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम होती है, इसलिए ये जल्दी निर्जलीकरण या हीट स्ट्रोक का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को पहले से हृदय, किडनी या डायबिटीज जैसी बीमारियां हैं, उन्हें भी ज्यादा खतरा रहता है। इन सभी लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए।
गर्मी के ऐसे मौसम में अपनी डाइट का ख्याल रखना भी बेहद जरुरी है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स,ऋषिकेश) की पूर्व आहार विशेषज्ञ डा. अनु अग्रवाल ने बताया,'' इस मौसम में हल्का और सुपाच्य भोजन लें। फल, सलाद, दही, छाछ, नारियल पानी, नींबू पानी, सत्तू, आम पन्ना और बेल का शरबत जैसी चीजें शरीर को ठंडक देती हैं और हाइड्रेट रखती हैं।''
उन्होंने बताया, '' चूंकि गोंद कतीरा और चिया सीड्स काफी मात्रा में पानी सोखते हैं, इसलिए गर्मियों में इन्हें अपनी डाइट में शामिल करने से शरीर को लंबे समय तक तरोताजा रखने में मदद मिलती है।''
उन्होंने बताया,'' इसके विपरीत, तैलीय और मसालेदार भोजन पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देता है और शरीर में अतिरिक्त गर्मी पैदा करता है। गर्मी में हमारा पाचन तंत्र पहले से ही थोड़ा कमजोर रहता है, ऐसे में भारी खाना खाने से गैस, उल्टी, एसिडिटी और असहजता की समस्या बढ़ सकती है। कई लोगों को खाने के बाद भारीपन और मतली महसूस होती है। इसलिए इस मौसम में हल्के, ताजे और घर में बने भोजन को ही प्राथमिकता दें ताकि शरीर संतुलित और स्वस्थ बना रहे।''
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राखी नरेश
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