असम: बोरा मंगलवार रात तक कांग्रेस से अपने इस्तीफे पर अंतिम निर्णय की घोषणा करेंगे
मनीषा
- 17 Feb 2026, 01:12 PM
- Updated: 01:12 PM
गुवाहाटी, 17 फरवरी (भाषा) कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कहा कि वह केंद्रीय नेतृत्व द्वारा पूछे जाने पर मंगलवार रात तक इस बारे में अपना अंतिम निर्णय घोषित करेंगे कि वह इस्तीफा वापस लेंगे या नहीं।
बोरा ने आज सुबह पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि अंतिम निर्णय लेने से पहले वह अपने शुभचिंतकों, करीबी सहयोगियों और लखीमपुर जिले के लोगों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा करना चाहेंगे, जहां से वह ताल्लुक रखते हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के आज शाम बोरा के आवास पर जाने की संभावना है।
शर्मा ने सोमवार को कहा था कि बोरा के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं और अगर वह आते हैं तो उन्हें ''सुरक्षित विधानसभा सीट से निर्वाचित'' कराया जाएगा।
बोरा ने बिना नाम लिए कांग्रेस के कुछ नेताओं पर हमला करते हुए कहा कि वह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) में रहने को तैयार हैं, लेकिन ''एपीसीसी (आर)'' में नहीं, जो स्पष्ट रूप से पार्टी के धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन की ओर इशारा था।
उन्होंने कहा, ''मैंने अपने त्यागपत्र में भी इस बात को स्पष्ट कर दिया है।''
हालांकि, हुसैन ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन कहा कि बोरा को कुछ शिकायतें हो सकती हैं, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता उनसे बात कर रहे हैं और मामला जल्द ही सुलझ जाएगा।
बोरा ने आरोप लगाया कि समागुरी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा उनके नाम का सुझाव दिया गया था, लेकिन उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया गया।
हुसैन के धुबरी लोकसभा सीट से चुने जाने के बाद समागुरी विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया था; और पार्टी का टिकट उनके बेटे तंजील हुसैन को दिया गया था, जो भाजपा के दीप्लू रंजन शर्मा से चुनाव हार गए थे।
बोरा ने दावा किया, ''2021 के विधानसभा चुनाव में, कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन का विरोध किया था और मैंने इस संबंध में पार्टी आलाकमान को कई बार पत्र लिखा था। चुनावों के बाद, गठबंधन खत्म हो गया और पिछले लोकसभा चुनाव में हुसैन को इसका सबसे बड़ा फायदा हुआ, उन्होंने एआईयूडीएफ नेता बदरुद्दीन अजमल को रिकॉर्ड अंतर से हराकर सीट जीती।''
उन्होंने कहा कि असम कांग्रेस अब दो गुटों में बंट गई है - एपीसीसी और एपीसीसी (आर) - तथा ''कई नेता कांग्रेस में रहना चाहते हैं, लेकिन एपीसीसी (आर) में नहीं।''
बोरा ने सोमवार देर रात पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने पार्टी में 32 साल बिताने के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए समय चाहिए।
उन्होंने कहा, ''त्यागपत्र भेज दिया गया है, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।'' बोरा ने कहा, ''मैं केंद्रीय नेतृत्व को निर्देश नहीं दे सकता, लेकिन मैंने इस पर विचार करने के लिए समय मांगा है।''
बोरा ने कहा, ''कई वरिष्ठ नेताओं और सहकर्मियों ने मुझसे सभी पहलुओं पर विचार करने के लिए कहा है, लेकिन किसी ने भी यह नहीं कहा कि मैंने त्यागपत्र भेजकर कुछ गलत किया है।''
मुख्यमंत्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कि वह बोरा के आवास पर जाएंगे, उन्होंने कहा, ''अगर कोई मुख्यमंत्री मेरे घर आना चाहते हैं, तो यह मेरे लिए गर्व की बात है।''
बोरा ने शर्मा की अपनी राजनीतिक यात्रा के साथ तुलना भी की।
उन्होंने कहा, ''58 विधायकों का समर्थन होने के बावजूद शर्मा को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, जिसके चलते उन्हें कांग्रेस छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। क्या यही आंतरिक लोकतंत्र है? इस तरह की राजनीति कब तक चलेगी? किसी को तो आवाज उठानी ही होगी, और मैंने उठा ली है।''
बोरा ने सोमवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, जिससे राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया, जहां कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह ने कल दावा किया था कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से बातचीत के बाद बोरा ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है, लेकिन कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए आलाकमान से समय मांगा है।
भाषा
नेत्रपाल मनीषा
मनीषा
1702 1312 गुवाहाटी