चंडीगढ़ पुलिस पर दंत चिकित्सक के ‘अपहरण’ के आरोप की जांच सीबीआई करेगी: न्यायालय
प्रशांत पवनेश
- 21 Aug 2024, 09:02 PM
- Updated: 09:02 PM
नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह चंडीगढ़ पुलिस द्वारा एक दंत चिकित्सक को अदालत में पेश होने से रोकने के लिए उसके कथित अपहरण की प्रारंभिक जांच करे।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि वह पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने की इच्छुक नहीं है, जिसमें प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया गया है।
न्यायालय ने हालांकि कहा कि मामले की स्वतंत्र जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को जांच सौंपी जा सकती है।
पीठ ने कहा, “प्रतिद्वंद्वी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, हम इस राय पर पहुंचे हैं कि भले ही यह मामला विदेशी नागरिकों की ओर से की गई शिकायत से उत्पन्न हुआ है, जो एक समय प्रतिवादी के मरीज थे, लेकिन हो सकता है उसके बाद इसने संविधान और कानूनों का घोर उल्लंघन किया हो और इसलिए आरोपों के संबंध में सभी संदेहों को दूर करने के वास्ते एक स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है क्योंकि वह एक नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित हैं।”
न्यायालय ने कहा, “तदनुसार, यह निर्देश दिया जाता है कि सीबीआई शिकायत में उल्लिखित तथ्यों के आधार पर उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार प्रारंभिक जांच करेगी।”
अदालत ने सीबीआई से यह पता लगाने को कहा कि क्या डॉक्टर को चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर 19 पुलिस स्टेशन में “हिरासत में लिया था या गिरफ्तार किया था” और 24 घंटे के भीतर स्थानीय मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था।
इसमें यह भी जांच की जाएगी कि क्या पुलिस अधिकारियों द्वारा डॉक्टर को “हिरासत में लेना या गिरफ्तार करना” अपहरण के समान था।
चंडीगढ़ स्थित दंत चिकित्सक धवन ने केन्या के नैरोबी की एक महिला से उसके इलाज के लिए बकाया राशि की वसूली के लिए मुकदमा दायर किया था।
उनके वकील ने अदालत को बताया कि इसके कारण दंत चिकित्सक को महिला को कथित रूप से अनुचित उपचार प्रदान करने की शिकायतों की एक श्रृंखला में फंसाया गया।
उसके वकील ने कहा था, “उनके खिलाफ तीन अलग-अलग शिकायतें दर्ज की गईं और उनमें से दो में उन्हें अग्रिम जमानत मिल गई। तीसरी शिकायत में उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने को कहा गया। लेकिन सुनवाई के दिन चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच पुलिस के एक दल ने उन्हें अगवा कर लिया, जबकि एक अन्य दल ने अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।”
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