उत्तर प्रदेश : अदालत ने वृंदावन के मंदिर को 'वार्षिकी' नहीं देने पर सरकार को लगाई फटकार
राजेंद्र रंजन जितेंद्र
- 20 Mar 2024, 12:34 AM
- Updated: 12:34 AM
प्रयागराज, 19 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वृंदावन के ठाकुर रंगजी महाराज विराजमान मंदिर और आठ अन्य मंदिरों को दी जाने वाली वार्षिकी पिछले चार वर्षों से रोके जाने को लेकर मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए राजस्व परिषद के आयुक्त और सचिव को बुधवार को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।
साथ ही अदालत ने अधिकारियों को यह भी बताने का निर्देश दिया कि 'वार्षिकी' क्यों रोककर रखी गई है।
अदालत ने कहा, ''तकनीक के इस दौर में वित्त वर्ष प्रारंभ होते ही राज्य सरकार को मंदिर के खाते में खुद से राशि का हस्तांतरण कर देना चाहिए। मथुरा के जिलाधिकारी द्वारा लखनऊ में विशेष सचिव को लिखा गया पत्र यह संकेत देता है कि लखनऊ में बैठे अधिकारियों को ट्रस्ट एवं मंदिरों को वार्षिकी जारी करने की परवाह नहीं है।''
अदालत ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को 24 घंटे के भीतर फैक्स के जरिए इस आदेश से प्रदेश के मुख्य सचिव को अवगत कराने का निर्देश दिया जो इस मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने ठाकुर रंगजी महाराज विराजमान मंदिर की याचिका पर यह आदेश पारित किया।
याचिका में उत्तर प्रदेश जमीदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार कानून, 1950 की धारा 99 के तहत निर्धारित वार्षिकी जारी करने की मांग की गयी थी, जिसे मथुरा के जिलाधिकारी और वरिष्ठ कोषाधिकारी द्वारा पिछले चार वर्षों से रोककर रखा गया है। याचिकाकर्ता की दलील है कि राजस्व परिषद द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने की वजह से नौ मंदिरों को देय 9,12,507 रुपये की वार्षिकी रोक कर रखी गई है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद कहा, ''अदालत यह देखकर हैरत में है कि मंदिरों और ट्रस्टों को राज्य सरकार से अपना बकाया जारी कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।''
अदालत ने कहा, ''यह एक वार्षिक कवायद है और संबंधित अधिकारियों को मंदिर की वार्षिकी जारी करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करनी चाहिए थी।''
इससे पहले अदालत ने राजस्व परिषद के आयुक्त व सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा था कि वार्षिकी जारी करने के लिए किस कारण से अनुमति नहीं दी जा रही है।
राजस्व परिषद के मुताबिक, फंड की कमी के चलते नौ मंदिरों की वार्षिकी रोकी गई।
भाषा राजेंद्र रंजन