संशोधित बही-खाते से खुलासा, आईएफआईएन को पांच साल में 5,654 करोड़ रुपये का घाटा हुआ
निहारिका अजय
- 16 Aug 2024, 04:35 PM
- Updated: 04:35 PM
नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) कर्ज में डूबी आईएलएंडएफएस लिमिटेड की समूह कंपनी आईएलएंडएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएफआईएन) को वित्त वर्ष 2013-14 से 2017-18 तक लगातार पांच वित्त वर्षों में 5,654 करोड़ रुपये का संचयी घाटा हुआ है।
समाधान प्रक्रिया से गुजर रही कंपनी के संशोधित बही-खाता से यह जानकारी मिली है।
हालांकि, कंपनी के मूल बही-खाते में उसे पांच साल की अवधि में कुल 1,015 करोड़ रुपये का लाभ होने की जानकारी दी गई थी।
आईएलएंडएफएस के नए निदेशक मंडल ने निर्देशों के अनुरूप पुराने वित्तीय खातों को दोबारा खोलने और नए सिरे से तैयार करने का काम पूरा कर लिया है।
इस साल जून में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ ने आईएलएंडएफएस समूह के नवनियुक्त बोर्ड को इसकी दो अन्य अनुषंगी कंपनियों- आईएलएंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन और आईएलएंडएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज के साथ संशोधित बही-खाते की दिशा में आगे बढ़ने की मंजूरी दी थी।
अद्यतन वित्तीय परिणामों से पता चला कि इन पांच वर्षों में कंपनी कुल आय भी घटकर 7,777 करोड़ रुपये रह गई, जबकि पहले यह 10,297 करोड़ रुपये बताई गई थी।
संशोधित बही-खाते से पता चलता है कि कंपनी ने वास्तव में मार्च, 2018 को समाप्त वित्त वर्ष में 3,322 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया था। हालांकि, पिछले प्रबंधन ने इस वित्त वर्ष में 100 करोड़ रुपये का लाभ होने की जानकारी दी थी।
इसी तरह, वित्त वर्ष 2016-17 में कंपनी को 1,315 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, जबकि मूल बही-खाते में इसके 209 करोड़ रुपये के लाभ की घोषणा की गई थी।
एनसीएलटी ने एक जनवरी, 2019 को समूह की तीन कंपनियों आईएलएंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन, आईएलएंडएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज और आईएलएंडएफएस इंजीनियरिंग के वित्तीय खातों को दोबारा खोलने और नए सिरे से तैयार करने की अनुमति देते हुए एक आदेश पारित किया था।
यह आदेश केंद्र सरकार की अर्जी पर दिया गया था। सरकार ने कर्ज में डूबी इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) के बोर्ड को निलंबित करने के साथ ही एक छह-सदस्यीय समिति नियुक्त की थी।
इस समय आईएलएंडएफएस अपने 90,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज को परिसंपत्ति समाधान के माध्यम से निपटाने की प्रक्रिया से गुजर रही है। कंपनी ने 30 सितंबर, 2023 तक कुल 35,650 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया था।
भाषा निहारिका