केंद्र के वकील के आचरण से नाराज़ ‘कैट’ शुक्रवार को नौकरशाह की याचिका पर करेगा फैसला
नोमान दिलीप
- 19 Mar 2024, 05:27 PM
- Updated: 05:27 PM
नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने एक नौकरशाह की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र के वकील के आचरण पर अप्रसन्नता जताते हुए कहा कि यदि प्रतिवादी के वकील उसके समक्ष उपस्थित नहीं होते हैं, तो शुक्रवार को मामले में एक तरफा आधार पर फैसला सुनाया जाएगा। एक आधिकारिक आदेश में यह जानकारी दी गई है।
यह निर्देश उत्तराखंड कैडर के 2002 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी द्वारा दिसंबर 2022 में दायर याचिका पर सोमवार को आया।
मामले की वीडियो कॉन्फ्रेंस से सुनवाई करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की प्रधान पीठ ने कहा कि प्रतिवादी-केंद्र सरकार की ओर से कोई भी पेश नहीं हुआ, हालांकि प्रतिवादियों के वकील एच. भास्कर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश हुए, लेकिन उन्होंने गुण-दोष के आधार पर मामले पर दलील रखने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति राजीव जोशी (न्यायिक सदस्य) और आनंद एस खाती (प्रशासनिक सदस्य) की पीठ ने आदेश जारी कर कहा कि प्रतिवादियों (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील टी सी अग्रवाल से भी संपर्क नहीं हो पाया और "हममें से एक के निजी सचिव ने अपने मोबाइल से टी सी अग्रवाल को बार-बार फोन किया... लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया या मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंस से पेश हुए।"
पीठ ने कहा कि प्रतिवादियों के वकील के आचरण की यह अदालत सराहना नहीं करती है और अदालत के पास मामले की सुनवाई को स्थगित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
आदेश की प्रति के अनुसार, अधिकरण ने मामले को 22 मार्च 2024 को सूचीबद्ध करने और प्रतिवादियों के दोनों वकीलों (भास्कर और अग्रवाल) को लिखित रूप में इस आदेश के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया।
अधिकरण ने कहा, "यह स्पष्ट किया जाता है कि मामले में तय की गई अगली तारीख पर, यदि प्रतिवादी के वकील उपस्थित होने में विफल रहते हैं, तो मामले का गुण-दोष के आधार पर एक तरफा फैसला किया जाएगा।"
चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव या समकक्ष स्तर की सूची में शामिल होने के लिए उनके आवेदन की अस्वीकृति से संबंधित सभी दस्तावेज, मूल्यांकन, विशेषज्ञ समितियों, सिविल सेवा बोर्ड (सीएसबी) की रिपोर्ट और सक्षम अधिकारियों के निष्कर्ष पेश करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की थी।
भाषा नोमान