मणिपुर: हमार के शीर्ष संगठन ने कहा, मेइती के साथ समझौता ‘अमान्य’
आशीष संतोष
- 03 Aug 2024, 06:48 PM
- Updated: 06:48 PM
इंफाल, तीन अगस्त (भाषा) मणिपुर के जातीय हिंसा प्रभावित जिरीबाम जिले में शांति बहाल करने के लिए हमार और मेइती प्रतिनिधियों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होने के एक दिन बाद हमार समुदाय के शीर्ष संगठन ने कहा कि यह समझौता ‘अमान्य’ है।
अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को जिरीबाम में फिर से हिंसा की सूचना मिली। उन्होंने बताया कि इलाके में गोलीबारी की घटना हुई और मेइती आबादी वाले गांव में एक खाली पड़े मकान को आग लगा दी गई।
समुदाय के शीर्ष संगठन ‘हमार इनपुई’ ने दावा किया कि उसकी संबद्ध इकाइयों ने मुख्यालय की जानकारी के बिना समझौते पर हस्ताक्षर किए और इसके जवाब में अपनी जिरीबाम इकाई को भंग कर दिया।
‘हमार इनपुई’ ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा, ‘‘हमार इनपुई, जनरल हेडक्वार्टर, असम के कछार में सीआरपीएफ केंद्र में एक अगस्त, 2024 को की गई शांति पहल के बारे में जानकर स्तब्ध है। इस तरह की पहली पहल एक जुलाई को सिलचर में हुई थी। हमार इनपुई ने इसमें शामिल होने वाले लोगों की निंदा की और हमारी पूर्व सहमति के बिना किए गए प्रयासों को नकार दिया है।’’
बयान में कहा गया कि ‘हमार इनपुई’ ने जिरीबाम क्षेत्र में अपने संगठन और उसके सभी संबद्ध संगठनों (एचवाईए, एचएसए, एचएनयू, एचडब्ल्यूए) को भंग कर दिया है।
मेइती और हमार समुदायों के प्रतिनिधियों ने बृहस्पतिवार को असम के कछार में सीआरपीएफ केंद्र में आयोजित एक बैठक में समझौता किया।
बैठक का संचालन जिरीबाम जिला प्रशासन, असम राइफल्स और (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने किया। बैठक में जिले के थाडौ, पैते और मिजो समुदायों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
जिरीबाम में हिंसा की नयी घटनाओं पर एक अधिकारी ने कहा, ‘‘यह एक अलग-थलग बस्ती है जिसमें कुछ मेइती घर हैं। जिले में हिंसा भड़कने के बाद उनमें से अधिकांश घर खाली हो चुके थे। उपद्रवियों ने क्षेत्र में सुरक्षा खामियों का फायदा उठाकर आगजनी की। उपद्रवियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।’’
उन्होंने बताया कि हथियारबंद लोगों ने गांव को निशाना बनाकर गोलीबारी की। अधिकारी ने बताया कि घटना के बाद सुरक्षा बलों को इलाके में भेजा गया।
पिछले साल मई से इंफाल घाटी स्थित मेइती और आसपास के पर्वतीय इलाकों में रहने वाले कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 200 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
भाषा आशीष