जलजमाव: अदालत ने अवरुद्ध नालों को साफ करने के लिए लगने वाला समय बताने को कहा
अमित पवनेश
- 25 Jul 2024, 09:59 PM
- Updated: 09:59 PM
नयी दिल्ली, 25 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नालों के अवरुद्ध होने का संज्ञान लेते हुए बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव नरेश कुमार से पूरी दिल्ली के नालों की सफाई के लिए विवरण और जरूरी समय के बारे में जानकारी मांगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने वकीलों सहित दिल्ली के कई निवासियों की याचिकाओं पर गौर किया। इन याचिकाओं में बारिश के बाद सड़कों, घरों और कार्यालयों में जलजमाव और नालियों के अवरुद्ध होने की समस्या बतायी गई थी।
पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी को नागरिकों से संबंधित ऐसे मुद्दों के समाधान के लिए एक नये मास्टर प्लान की आवश्यकता है।
पीठ ने कहा, "ये वास्तव में जाम हो चुके नाले हैं। इन्हें रातों-रात साफ नहीं किया जा सकता। इनमें से कुछ को 40-50 सालों में साफ नहीं किया गया है।"
पीठ ने कहा, "उन्हें पूरी व्यवस्था फिर से बनानी होगी, नया मास्टर प्लान बनाना होगा। हमारी कुल आबादी 3.3 करोड़ है।"
नागरिकों की ओर से पेश वकीलों ने आरोप लगाया कि मानसून के मौसम की शुरुआत से पहले उनके क्षेत्र में नालों की सफाई नहीं की गई और जब कुछ क्षेत्रों में अधिकारियों द्वारा यह काम किया गया, तो कीचड़ सड़क पर छोड़ दी गयी, जो कि बारिश के बाद फिर से नाले में बह गयी।
कुछ वकीलों ने दावा किया कि डिफेंस कॉलोनी में उनके कार्यालयों में इस हद तक पानी भर गया कि उनके प्रिंटर और कंप्यूटर खराब हो गए। अदालत ने कोटला मुबारकपुर और गढ़ी गांव में जलजमाव के मुद्दे पर भी सुनवाई की।
अदालत ने कहा कि अधिकारियों द्वारा "जो भी सबसे अच्छा होगा, वह किया जाएगा।" उसने कहा कि पानी निकालने के लिए संबंधित मशीनरी उनके द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।
दिल्ली के मुख्य सचिव सुनवाई के दौरान डिजिटल तरीके से मौजूद थे। उन्होंने कहा कि डिफेंस कॉलोनी में नाले की सफाई का काम किया जाएगा, जो कि मुख्य रूप से ढका हुआ है।
उन्होंने कहा कि अन्य खुले नालों की सफाई का काम अधिकांश विभागों द्वारा पहले ही किया जा चुका है।
अदालत ने कहा कि वह नालों से गाद निकालने का निर्देश देगी और मुख्य सचिव से इस काम के लिए लगने वाला समय और अन्य विवरण देने को कहा।
अदालत ने कहा, "हमें हलफनामा दीजिए कि आप पूरे शहर से गाद कैसे निकालना चाहते हैं, आपको क्षेत्रवार कितना समय चाहिए।"
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि यमुना को स्वतंत्र रूप से बहने दिया जाना चाहिए। अदालत ने कहा, "आपको यमुना को बहने देना चाहिए। बाढ़ के मैदान पर बैंक्वेट हॉल न बनाएं।’’
मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।
भाषा अमित