दिल्ली विश्वविद्यालय ने स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष की फीस बढ़ाई
जितेंद्र नेत्रपाल
- 25 Jul 2024, 09:55 PM
- Updated: 09:55 PM
नयी दिल्ली, 25 जुलाई (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय ने 2024-2025 शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लेने वाले विदेशी विद्यार्थियों के साथ-साथ स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रमों के प्रथम वर्ष में नामांकित विद्यार्थियों के लिए फीस में वृद्धि की है।
कुलपति योगेश सिंह ने अगस्त से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र के लिए नयी फीस संरचना को जून में ही मंजूरी प्रदान कर दी थी।
नयी फीस संरचना के अनुसार, प्रथम वर्ष के बीटेक विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम शुल्क में 3.70 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। विद्यार्थियों को अब फीस के रूप में 2.16 लाख रुपये के बजाय 2.24 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
प्रौद्योगिकी संकाय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह वृद्धि केवल प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों पर ही लागू की गई है।
विश्वविद्यालय ने फीस संरचना के कई घटकों में वृद्धि की है, जिसमें ट्यूशन फीस, छात्र कल्याण निधि, विकास शुल्क, सुविधाएं और सेवा शुल्क, तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सहायता निधि शामिल हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के लिए अंशदान खंड को विभाग की फीस संरचना से हटा दिया गया है। इसी तरह, पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम की फीस में पांच प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो 1.90 लाख रुपये से बढ़कर 1.99 लाख रुपये हो गई है।
शिक्षा संकाय के चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) की फीस बढ़ाकर 57,400 रुपये कर दी गई है।
आईटीईपी ने बी.एल.एड. की जगह ली है।
पीएचडी पाठ्यक्रमों की फीस संरचना के घटकों में संशोधन के परिणामस्वरूप कुल फीस में 60.22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दिल्ली विश्वविद्यालय में पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को आगामी सत्र से 4,450 रुपये के बजाय 7,130 रुपये का भुगतान करना होगा।
डीयू में प्रवेश मामलों के डीन हनीत गांधी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विदेशी विद्यार्थियों की फीस में वृद्धि की पुष्टि की।
इस बीच, दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विदेशी नागरिकों को कम फीस देनी होगी।
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के सदस्य देशों के विद्यार्थियों के लिए फीस एक लाख रुपये से घटाकर 50 हजार रुपये और गैर-सार्क देशों के विद्यार्थियों के लिए दो लाख रुपये से घटाकर एक लाख रुपये कर दी गई है।
तिब्बती आवेदकों को हालांकि विश्वविद्यालय पंजीकरण शुल्क और विदेशी विद्यार्थियों के रूप में कॉलेजों व विभागों को देय अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने से छूट दी जाएगी।
भाषा जितेंद्र