कर्नाटक : करोड़ों रुपये के वाल्मीकि निगम धनशोधन मामले की जांच का दायरा बढ़ा
धीरज सुभाष
- 25 Jul 2024, 09:17 PM
- Updated: 09:17 PM
बेंगलुरु, 25 जुलाई (भाषा) कर्नाटक ‘वाल्मीकि निगम’ में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन मामले की जांच का दायरा बढ़ने वाला है। जांच अधिकारी अपनी निगरानी के दायरे में ऐसे कई व्यक्तियों को ला रहे हैं जिन पर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई करने का संदेह है। आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल में दावा किया था कि निगम की ‘‘बड़ी’’ धनराशि का ‘‘दुरुपयोग’’ लोकसभा चुनावों के दौरान शराब खरीदने के अलावा कुछ महंगे वाहनों की खरीद में किया गया था। इस सिलसिले में भी ईडी के एक रिपोर्ट निर्वाचन आयोग से साझा करने की उम्मीद है।
सूत्रों ने बताया कि राज्य समाज कल्याण विभाग के अपर निदेशक बी. कल्लेश की भूमिका भी ‘‘गहन जांच’’ के दायरे में है। उन्होंने दावा किया था कि संघीय एजेंसी के अधिकारी उन पर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, गिरफ्तार पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक बी नागेंद्र और वित्त विभाग का नाम लेने के लिए दबाव डाल रहे थे।
कल्लेश ने दो ईडी अधिकारियों की पहचान उप निदेशक मनोज मित्तल और सहायक निदेशक मुरली कन्नन के रूप में की थी जिन्होंने कथित तौर पर उनपर दबाव डाला था।
कर्नाटक पुलिस ने कल्लेश की शिकायत पर बेंगलुरू में पदस्थ दो ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इस प्राथमिकी के खिलाफ ईडी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया। अदालत ने इस सप्ताह के शुरुआत में पुलिस की प्राथमिकी पर रोक लगाते हुए टिप्पणी की कि यह अपना कर्तव्य निभा रहे अधिकारियों के खिलाफ संभावित तौर पर कानून का दुरुपयोग है।
सूत्रों ने बताया कि माना जा रहा है कि कल्लेश के निलंबन मामले की जांच में राहत पाने के लिए कुछ उच्च पदस्थ लोगों के दबाव में यह प्राथमिकी दर्ज की गई।
सूत्रों ने बताया कि कल्लेश के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच ईडी और सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) कर रही है।
सूत्रों ने बताया कि कल्लेश ईडी की जांच के दायरे में है क्योंकि माना जा रहा है कि वाल्मीकि निगम में हुई कथित अनियमितताओं में वह एक ‘‘महत्वपूर्ण कड़ी’’ था। सूत्रों के मुताबिक, मामले में उसकी भूमिका को साबित करने के लिए ईडी ने कुछ ‘‘ठोस सबूत’’ एकत्र किए हैं।
सूत्रों ने बताया कि ईडी इस मामले से जुड़े विभिन्न सरकारी और निजी व्यक्तियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में है, जबकि कुछ और लोगों को जल्द ही तलब किया जा सकता है।
कथित अनियमितताएं उस वक्त सामने आईं, जब निगम के लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन पी 21 मई को मृत पाए गए।
‘सुसाइड नोट’ में चंद्रशेखरन ने आरोप लगाया कि उनके बैंक खाते से निगम की 187 करोड़ रुपये की राशि का अनधिकृत हस्तांतरण किया गया।
घोटाले के सिलसिले में आरोप लगने के बाद अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र ने छह जून को पद से इस्तीफा दे दिया था। नागेंद्र को 12 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल इस मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।
भाषा धीरज