कर्नाटक: विपक्ष की एमयूडीए घोटाले पर चर्चा की मांग को लेकर विधानसभा में तीखी नोकझोंक
प्रशांत पवनेश
- 25 Jul 2024, 05:16 PM
- Updated: 05:16 PM
बेंगलुरु, 25 जुलाई (भाषा) कर्नाटक विधानसभा में बृहस्पतिवार को कार्यवाही के दौरान काफी गहमागहमी भरा माहौल देखने को मिला, जब विपक्षी भाजपा और जद (एस) ने सदन के बीचों-बीच विरोध प्रदर्शन करते हुए मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) द्वारा कथित धोखाधड़ी से भूमि आवंटन पर चर्चा की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती भी इस घोटाले में लाभार्थी हैं।
नियमों का हवाला देते हुए विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर ने बुधवार को एमयूडीए मामले पर विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव के नोटिस को खारिज कर दिया, जिससे सिद्धरमैया और कांग्रेस सरकार को घेरने की विपक्ष की योजना को झटका लगा।
इसके बाद विपक्ष ने घोषणा की थी कि वे इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर विधान सभा और विधान परिषद दोनों में “दिन-रात” धरना देंगे। बुधवार को विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित होने के बाद दोनों दलों के विधायक वहीं रुक गए और अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखते हुए पूरी रात दोनों सदनों में ही बिताई।
बृहस्पतिवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, भाजपा और जद (एस) के सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए सदन के बीचों-बीच आ गए।
वरिष्ठ भाजपा विधायक सुनील कुमार ने कहा, “एमयूडीए घोटाले में सभी नियमों का उल्लंघन करके भूखंड लिये गए, लेकिन आप (अध्यक्ष) नियमों का हवाला देते हैं (चर्चा की हमारी मांग को खारिज करते हुए)। आप इस मुद्दे को चर्चा के लिए मंजूर क्यों नहीं करते। क्या भूखंड नियमों के अनुसार लिये गए थे?
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मामले को “लीपा-पोती कर बंद करने” का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि डर है कि अगर चर्चा हुई तो सच्चाई सामने आ जाएगी। इसके लिए आसन (विधानसभा अध्यक्ष का पद) का इस्तेमाल किया जा रहा है। कृपया अपने फैसले पर पुनर्विचार करें और चर्चा की अनुमति दें। अगर सदन में नहीं तो हम कहां चर्चा करें?”
सुनील कुमार और विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सरकार पर चर्चा से भागने और इसके लिए ‘आसन’ का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया, तो मंत्री एच. के. पाटिल और चेलुवरायस्वामी सहित कांग्रेस विधायकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसके परिणामस्वरूप वहां कुछ बहस हुई।
अशोक ने आरोप लगाया कि यह 3000-4000 करोड़ रुपये का घोटाला है और उन्होंने बुधवार को मुख्यमंत्री द्वारा राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के बारे में जानना चाहा। उन्होंने पूछा, “क्या राज्यपाल ने एमयूडीए घोटाले पर स्पष्टीकरण मांगा है?”
इसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी। जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो भाजपा और जद(एस) विधायकों ने अपना विरोध जारी रखा।
अशोक, सुनील कुमार और अन्य विपक्षी नेताओं ने एक बार फिर अध्यक्ष खादर से एमयूडीए घोटाले पर चर्चा की अनुमति देने का आग्रह किया।
अशोक ने कहा कि एक दलित परिवार की जमीन को उनके परिवार के एक सदस्य के हस्ताक्षर लेकर और अन्य लोगों की सहमति के बिना अवैध रूप से हड़प लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री स्वयं इस घोटाले में शामिल हैं। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री को चीजों की रक्षा करनी चाहिए, वह खुद घोटाले में शामिल हैं। इस घोटाले की सीबीआई से जांच होनी चाहिए, मुख्यमंत्री को एक सेकंड के लिए भी सत्ता में नहीं रहना चाहिए।”
अशोक ने दावा किया, “एक ही दिन में सीएम को चौदह भूखंड दिये गये और उनके परिवार के नाम पंजीकृत कर दिये गये।”
विरोध और नारेबाजी के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही संचालित की, जिसमें कई मंत्रियों और सदन की कई समितियों के प्रमुखों ने विधानसभा के पटल पर प्रपत्र और रिपोर्ट रखीं तथा छह विधेयक बिना किसी चर्चा के पारित कर दिए गए।
इसके अलावा, आगामी जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन, “एक राष्ट्र, एक चुनाव” प्रस्ताव और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के खिलाफ प्रस्तावों को विपक्षी दलों के विरोध के बीच बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया।
यह आरोप लगाया गया है कि सिद्धरमैया की पत्नी को मैसूर के एक पॉश इलाके में प्रतिपूरक भूखंड आवंटित किया गया था, जिसका संपत्ति मूल्य उनकी भूमि के स्थान की तुलना में अधिक था, जिसे एमयूडीए द्वारा “अधिग्रहित” किया गया था।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया के कई समर्थकों को भी कथित तौर पर “इस तरह से लाभ मिला है”।
एमयूडीए ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ जमीन के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे, जहां एमयूडीए ने एक आवासीय क्षेत्र विकसित किया था।
विवादास्पद योजना में क्षेत्र के विकास के लिए अधिग्रहित अविकसित भूमि के बदले में भूमि खोने वाले को 50 प्रतिशत विकसित भूमि आवंटित करने की परिकल्पना की गई है।
भाषा
प्रशांत