कसरत कुछ खाद्य वस्तुओं से एलर्जी की वजह बन सकती है
पारुल मनीषा
- 17 Jul 2024, 01:38 PM
- Updated: 01:38 PM
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) अच्छी सेहत के लिए कसरत जरूरी मानी जाती है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों का कारण भी बन सकती है।
“फूड डिपेंडेंट एक्सरसाइज इंड्यूस्ड एनाफिलैक्सिस’’ (एफडीईआईए)वह अवस्था है, जिसमें कसरत से पहले कोई खाद्य पदार्थ खाने से कसरत के बाद एलर्जी की शिकायत हो जाती है।
सर गंगा राम अस्पताल में हाल में ऐसे ही एक मामले में 12 साल के एक स्वस्थ लड़के ने क्रिकेट मैच खेलने के लिए घर से बाहर निकलने से पहले झींगा सलाद खाया था। मैच शुरू होने के महज 10 मिनट बाद उसे जबरदस्त खुजली, सूजन और सांस लेने में तकलीफ होने लगी।
अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट और जानी-मानी एलर्जिस्ट, पीडियाट्रिक इंटेंसिविस्ट एवं नींद विशेषज्ञ डॉ. नीरजा गुप्ता ने बताया कि लड़के को फौरन पास के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसमें एनाफिलैक्सिस के लक्षण देखे।
डॉ. गुप्ता के मुताबिक, बाद में जांच से पता चला कि लड़के में यह समस्या शारीरिक सक्रियता से पहले झींगा सलाद खाने की वजह से उभरी थी और यह स्पष्ट रूप से एफडीईआईए का मामला है।
एफडीईआईए के बारे में समझाते हुए डॉ. गुप्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “एफडीईआईए वह अवस्था है, जिसमें कसरत से पहले कोई खाद्य पदार्थ खाने से कसरत के बाद एलर्जी की शिकायत होने लगती है।”
उन्होंने बताया कि सामान्य खाद्य एलर्जी के लक्षण आमतौर पर खाने के तुरंत बाद उभरने लगते हैं, जबकि एफडीईआईए में लक्षण व्यायाम या किसी अन्य तीव्र शारीरिक गतिविधि से पहले एलर्जी के लिए जिम्मेदार खाद्य वस्तुओं के सेवन के कारण उभरते हैं।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि यूं तो एफडीईआईए किसी भी खाद्य वस्तु के सेवन से उभर सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में घोंघा, मेवा, गेहूं और डेयरी उत्पाद इसके उभार का कारण बनते हैं।
उन्होंने बताया कि एफडीईआईए पीड़ितों को पित्त चढ़ने और पेट में ऐंठन से लेकर एनाफिलैक्सिस जैसे जानलेवा लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है।
बचाव के उपाय के बारे में डॉ. गुप्ता ने कहा कि लोगों को ‘फूड डायरी’ बनानी चाहिए, एलर्जी की जांच और निदान के लिए एलर्जिस्ट से संपर्क करना चाहिए, कसरत से पहले एलर्जी का कारण बनने वाली खाद्य वस्तुओं के सेवन से बचना चाहिए और एफडीईआईए की पुष्टि होने पर एपिनेफ्राइन ऑटो-इंजेक्टर साथ लेकर चलना चाहिए।
भाषा पारुल