युवक प्रदर्शनकारी को पैलेट से चोट लगी, एक आंख की रोशनी जाने का खतरा
रंजन
- 23 Jul 2026, 07:50 PM
- Updated: 07:50 PM
(मानसी जगानी)
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) नीट प्रश्नपत्र 'लीक' मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए अपने भतीजे को देखकर अजय दुग्गल के मन में सबसे पहले यही विचार आया कि ''यदि 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई तो क्या होगा''।
साहिल लोचब को 20 जून को राष्ट्रीय राजधानी में हुए कॉजपा के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन (छर्रों) से दाहिनी आंख में चोट लगी थी।
साहिल के चाचा ने उससे पूछा कि वह उस आंख से क्या देख पा रहा है। उसका यह जवाब सुनकर वह सिहर उठे कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा।
दुग्गल ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''साहिल ने कहा कि उसकी आंख पर चोट लगी थी। हमें जो बताया गया है, उसके अनुसार पुतली से जुड़े एक और ऑपरेशन से यह पता चलेगा कि उसकी दृष्टि वापस आएगी या नहीं।''
दिल्ली पुलिस के अनुसार, नजफगढ़ का यह किशोर उन 60 प्रदर्शनकारियों में शामिल था, जो घायल हुए थे।
उसे 'संसद चलो' मार्च के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन से चोटें आईं। कम से कम एक अन्य व्यक्ति को भी इसी तरह की चोटें आईं।
साहिल की आंख की एक सर्जरी हो चुकी है और जबकि दूसरी सर्जरी अभी होनी है।
उसे सबसे पहले लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया और बाद में सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद 21 जुलाई को उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर में स्थानांतरित किया गया।
दुग्गल ने कहा, ''जब उसे यहां लाया गया, तब वह होश में था। वह हमसे बात कर रहा था। लेकिन जब मैंने उसका चेहरा देखा, तो मेरी नजर बार-बार उसकी आंखों पर जा रही थी और मैं यही सोच रहा था — अगर उसकी आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई तो क्या होगा?''
उन्होंने कहा, ''मैंने उससे पूछा, 'बेटा, क्या तुम्हें ठीक से दिखाई दे रहा है?' उसने हमें बताया कि उसे अपनी दाहिनी आंख से बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रहा है। वहां पूरी तरह अंधेरा है।''
डॉक्टरों ने शुरुआत में परिवार को बताया था कि साहिल की आंखों की रोशनी वापस आने की संभावना केवल ''एक प्रतिशत'' है।
बृहस्पतिवार को उसके डॉक्टरों ने कहा कि उसके ठीक होने की संभावनाएं हैं।
दुग्गल ने कहा, ''आज डॉक्टरों ने हमें कुछ आश्वासन दिया और कहा कि उसकी आंखों की रोशनी वापस आने की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं। लेकिन उसे बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रहा है और वह बहुत दर्द में है।''
सूत्रों ने बताया कि युवक के चेहरे, गर्दन, सीने, दाहिने कंधे और बांह पर पैलेट से लगी कई चोटें हैं। एक पैलेट उसकी दाहिनी आंख में फंस गया था, जिससे कॉर्निया में छेद हो गया था।
साहिल के परिवार का कहना है कि उसका उद्देश्य पुलिस बल में जाने का था। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के 'स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग' का छात्र है और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
दुग्गल ने कहा, ''वह हमेशा पुलिस अधिकारी बनना चाहता था। वह पढ़ाई कर रहा था और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था।''
वह पहले भी कॉजपा के उस प्रदर्शन में शामिल हुआ था, जिसकी शुरुआत 20 जून को जंतर-मंतर पर हुई थी। इसके बाद वह 20 जुलाई को फिर वहां गया और उसने अपने परिवार से कहा था कि यह महत्वपूर्ण है।
दुग्गल ने कहा, ''हमने उसे रोकने की कोशिश भी की थी, लेकिन आप जानते हैं कि बच्चे कैसे होते हैं, वे बात नहीं सुनते।''
परिवार अस्पताल के बाहर इंतजार कर रहा है और यह उम्मीद किये हुए है कि उनके बच्चे की आंखों की रोशनी पूरी तरह वापस आ जाएगी।
दिल्ली पुलिस ने इस बात से इनकार किया है कि मार्च के दौरान उसके कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किया था।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का त्वरित कार्रवाई बल भी उस दिन सड़कों पर तैनात था। सीआरपीएफ ने पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।
साहिल उन प्रदर्शकारियों में अकेला नहीं है, जिसे प्रदर्शन के दौरान गंभीर चोट आई है।
उसके साथ गुरुग्राम के रहने वाले 25 वर्षीय शेख मंसूरी भी हैं। उन्हें चेहरे पर कथित तौर पर पैलेट से चोट लगी है। उन्हें लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उनकी सर्जरी की गई और संभव है कि उन्हें एक और सर्जरी की आवश्यकता पड़े।
साक्षी (21) जंतर-मंतर और टॉलस्टॉय मार्ग के निकट भगदड़ जैसी स्थिति में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अब उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया गया है।
भाषा देवेंद्र रंजन
रंजन
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