राम मंदिर ट्रस्ट ने 'धार्मिक समिति' के पुनर्गठन और प्रवक्ता, सचिव की नियुक्ति का निर्णय लिया
धीरज
- 22 Jul 2026, 09:34 PM
- Updated: 09:34 PM
(तस्वीर के साथ)
अयोध्या (उप्र), 22 जुलाई (भाषा) अयोध्या स्थित राम मंदिर का प्रबंधन करने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को हुई अहम बैठक में मंदिर में पूजा-पाठ की सम्पूर्ण व्यवस्था के लिये गठित 'धार्मिक समिति' का पुनर्गठन करके उसमें अयोध्या के पांच संतों समेत कुल नौ सदस्यों को शामिल करने और न्यास (ट्रस्ट) का एक प्रवक्ता तथा सचिव नियुक्त करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में न्यास के सदस्यों ने सावन के महीने में श्रद्धालुओं की संख्या में संभावित बढ़ोतरी के लिए की गई तैयारियों, न्यासी (ट्रस्टी)के तीन रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में हुई प्रगति और कई प्रशासनिक व वित्तीय मुद्दों की समीक्षा की।
राम मंदिर कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर उठे विवाद के बीच विगत छह जुलाई को भी न्यास की बैठक हुई थी जिसमें न्यास के महासचिव रहे चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वत: स्वीकार माने गये थे।
न्यास के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बुधवार को हुई न्यास की बैठक में लिये गये निर्णयों की जानकारी देते हुए संवाददाताओं को बताया कि बैठक में न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पद के लिये 5200 आवेदन प्राप्त हुए हैं और इतनी बड़ी संख्या में अर्जियां आने की वजह से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिये संबंधित समिति ने एक माह का और समय मांगा था, जिसकी अनुमति दे दी गयी।
उन्होंने बताया कि साथ ही सीईओ की नियुक्ति में हो रहे विलंब को देखते हुए एक सचिव की नियुक्ति का निर्णय लिया गया।
न्यास के सूत्रों के मुताबिक सीईओ का पद वित्तीय निगरानी को मजबूत बनाने, संस्थागत जवाबदेही में सुधार करने और मंदिर के दैनिक कामकाज को सुव्यवस्थित करने के लिए व्यापक प्रशासनिक बदलाव के तहत सृजित किया गया है।
कृष्ण मोहन ने यह भी बताया कि मीडिया के माध्यम से समाज के साथ संवाद की निरंतरता की आवश्यकता पर विचार करते हुए न्यास ने एक प्रवक्ता नियुक्त करने का निर्णय भी लिया है।
उन्होंने बताया कि न्यास की अगली बैठक दो सितंबर को होगी। कृष्ण मोहन ने बताया कि न्यासी मंडल ने अनियमितताएं सामने आने के बाद बैंक की प्रक्रिया और गंभीरता के अभाव पर निराशा प्रकट की है।
उन्होंने बताया कि भक्तों के चढ़ावे की गिनती में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रहे विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट पर चर्चा नहीं हो सकी, क्योंकि न्यास को अभी तक वह रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
कृष्ण मोहन ने बताया कि हालांकि, न्यासियों ने उच्चतम न्यायालय में इस मामले को लेकर चल रही कार्यवाही और मंदिर के दान में कथित हेराफेरी से जुड़ी याचिकाओं पर अदालत के निर्देशों का संज्ञान लिया।
उन्होंने बताया कि न्यासियों ने मंदिर के सीसीटीवी नेटवर्क की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की और इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सभी सुरक्षा अधिकारियों के पास सम्पूर्ण निगरानी प्रणाली पर नजर रखने की सुविधा मौजूद है, जिसमें दान की गिनती वाले कमरे में लगे कैमरे भी शामिल हैं।
कृष्ण मोहन ने कहा कि न्यास ने चढ़ावे की गिनती के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई)के साथ हुए समझौते की भी समीक्षा की और गड़बड़ियों के सामने आने के बाद बैंक के रवैये पर निराशा जताई।
उन्होंने बताया कि न्यासी मंडल ने न्यास की वित्त समिति को बैंक के साथ अपने संबंधों की समीक्षा करने और कोई उचित निर्णय लेने से पहले मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की जांच करने का निर्देश दिया।
कृष्ण मोहन ने बताया कि न्यासी इस बात से संतुष्ट थे कि सोने और चांदी के चढ़ावे की मात्रा और शुद्धता की जांच के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की टकसाल के साथ व्यवस्था बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।
उन्होंने बताया कि न्यासी मंडल ने न्यासियों के रिक्त स्थानों की पूर्ति के लिए किये जा रहे प्रयासों का संज्ञान लिया और पाया कि इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने में कुछ और सप्ताह लगेंगे।
कृष्ण मोहन ने दावा किया कि तमाम दुष्प्रचार और आरोपों के बावजूद श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या यथावत है, जो इस बात का प्रमाण है कि आधारहीन, मिथ्य और भ्रामक आरोपों के बाद भी करोड़ों राम भक्तों की आस्था व विश्वास अटूट है।
उन्होंने बताया कि न्यासी मंडल ने इस अटूट समर्थन के लिए संपूर्ण संत समुदाय, देश-विदेश से आ रहे भक्तों और अयोध्या वासियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।
न्यास के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि न्यास ने मंदिर के सभी धार्मिक कार्यों का दायित्व अयोध्या के संतों को सौंपने का फैसला लेते हुए 'धार्मिक समिति' का पुनर्गठन किया है।
उन्होंने बताया कि उनकी अध्यक्षता वाली इस नौ सदस्यीय समिति में अयोध्या के पांच संत महंत कमल नयन दास, स्वामी रामानंद दास जी महाराज, राजकुमार दास जी महाराज, स्वामी मिथिलेश नंदनी शरण जी महाराज और स्वामी दिनेंद्र राज महाराज शामिल हैं।
गिरि ने बताया कि समिति में जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी युगपुरुष परमानन्द और स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ भी शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि यह समिति राम मंदिर में दैनिक पूजा को वैदिक रामनंदीय परम्परा के अनुसार सम्पन्न कराने, उत्सवों एवं पर्वों को मनाने का दिन निर्धारण करके उनका आयोजन करने तथा पूजा-पाठ से जुड़े अन्य तमाम विषयों पर निर्णय लेगी।
गिरि ने बताया कि न्यास ने पुजारियों के प्रशिक्षण की परम्परा को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिये एक स्थायी पाठशाला शुरू करने का भी निर्णय लिया है।
भाषा किशोर सलीम जफर धीरज
धीरज
2207 2134 अयोध्या