अन्नामलाई ने नीट मुद्दे को लेकर केंद्र पर साधा निशाना
रंजन
- 22 Jul 2026, 08:18 PM
- Updated: 08:18 PM
चेन्नई, 22 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व नेता के. अन्नामलाई ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के मुद्दे पर बुधवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि तीन बार प्रश्नपत्र लीक होने के बावजूद किसी की जवाबदेही तय नहीं की गई। अन्नामलाई ने दावा किया कि इसी के चलते छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा।
अन्नामलाई ने यह सवाल भी किया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू करने में इतनी देर क्यों की।
अब "वी द लीडर्स" आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अन्नामलाई ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन एक मौलिक अधिकार है। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत शुरू करने में इतना समय क्यों लगाया।
भाजपा की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई ने यह सवाल किया, ''सार्थक बातचीत तब तक क्यों टाली गई, जब तक कि विरोध प्रदर्शन एक तनावपूर्ण स्थिति तक नहीं पहुंच गया? आपको किस बात ने इंतजार करने के लिए मजबूर किया?"
अन्नामलाई ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वह व्यक्तिगत रूप से नीट के समर्थन में रहे हैं। उनका तर्क था कि इससे छात्रों के चयन में एकरूपता आई और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले अभ्यर्थियों को चिकित्सा शिक्षा हासिल करने के अपने सपने को पूरा करने का "वास्तविक अवसर" मिला।
उन्होंने कहा कि हालांकि, पिछले पांच वर्षों में नीट-यूजी का प्रश्नपत्र तीन बार लीक हो चुका है। उन्होंने कहा, "कल्पना कीजिए कि उन छात्रों पर कितना दबाव पड़ा होगा, जिन्हें परीक्षा प्रक्रिया से एक बार फिर गुजरना पड़ा, जबकि जिस व्यवस्था का उद्देश्य चयन प्रक्रिया में एकरूपता लाना था, वही विफल हो रही थी।"
उन्होंने आरोप लगाया, "इसके बावजूद कोई जवाबदेही तय नहीं की गई और मेरा दृढ़ विश्वास है कि यही वह समय था, जब छात्रों की सोच में बदलाव आया और वे अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए।"
उन्होंने एक बयान में कहा, ''मैं भाजपा नीत केंद्र सरकार से आग्रह करता हूं कि वह सार्थक संवाद करे, पारदर्शिता बनाए रखे और उठाई गई चिंताओं के समाधान के लिए शीघ्र एवं उचित कदम उठाए।''
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की ताकत इस बात में निहित होती है कि उसके युवा उसकी संस्थाओं पर कितना भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा, ''यदि हमारे छात्रों का शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता से विश्वास उठ गया है, तो ऐसी स्थिति हमारे देश के भविष्य को खतरे में डालने जैसी होगी।''
भाषा अमित रंजन
रंजन
2207 2018 चेन्नई