कोई भी देश या समूह अकेले वैश्विक अस्थिरता का सामना नहीं कर सकता : भारत-आसियान बैठक में जयशंकर
अविनाश
- 22 Jul 2026, 07:34 PM
- Updated: 07:34 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ समुद्री सहयोग पर भी दबाव बढ़ने से दुनिया में उथल-पुथल लगातार बढ़ रही है तथा कोई भी अकेला देश या समूह इस अस्थिरता और व्यवधान का अपने दम पर सामना नहीं कर सकता।
जयशंकर ने मनीला में भारत-आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आसियान की केंद्रीय भूमिका के प्रति भारत का समर्थन दोहराया।
आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन) को इस क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक माना जाता है। भारत के साथ ही अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत कई अन्य देश इसके संवाद साझेदार हैं।
जयशंकर ने कहा कि अस्थिरता और व्यवधान के इस दौर में सबसे स्पष्ट दबाव आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
उन्होंने कहा, ''चूंकि हम समुद्री व्यापार पर भी निर्भर हैं, इसलिए यह भी चिंता का विषय बन सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण है।"
जयशंकर ने कहा कि गहन सहयोग के माध्यम से ही जोखिम कम किए जा सकते हैं और विकल्पों का विस्तार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ''दुनिया लगातार अधिक उथल-पुथल भरी होती जा रही है और यह तेजी से स्पष्ट हो रहा है कि कोई भी अकेला देश या यहां तक कि कोई समूह भी अपने दम पर इसका सामना नहीं कर सकता। आइए, निकट भविष्य पर विचार करें और देखें कि हमारा सहयोग किस तरह हमारे-अपने हितों की सर्वोत्तम ढंग से पूर्ति कर सकता है।"
उन्होंने कहा कि चुनौतियों के बावजूद भारत और आसियान विकास के साझा दृष्टिकोण को लेकर आशावादी हैं।
जयशंकर ने कहा, "इसलिए चुनौतियों का सामना करते हुए भी हमारी नजर अवसरों पर दृढ़ता से टिकी रहनी चाहिए और ऐसे अनेक अवसर हमारे बीच मौजूद हैं।"
उन्होंने कहा, ''आज भारत-आसियान एजेंडे में व्यापार और निवेश, लोगों की आवाजाही और प्रतिभा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल क्षेत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), हरित विकास एवं टिकाऊपन के साथ-साथ कनेक्टिविटी जैसे विषय शामिल हैं।"
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और आसियान ने परंपरागत रूप से व्यापक क्षेत्र के कल्याण के लिए मिलकर काम किया है। उन्होंने कहा, "भारत के लिए आसियान की केंद्रीय भूमिका एक प्रमुख सिद्धांत है। इसका एक उदाहरण यह है कि हिंद-प्रशांत पर आसियान का दृष्टिकोण भारत की 'हिंद-प्रशांत महासागर पहल' के साथ किस प्रकार मेल खाता है।"
उन्होंने कहा, "गतिविधियों, आंकड़ों और नीतियों में कई अन्य क्षेत्र और उदाहरण भी दिखाई देते हैं। यह बदलाव के दौर से गुजरती हुई दुनिया है और दो अरब की आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत तथा आसियान को इसे सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने के लिए मिलकर आगे बढ़ना होगा।"
जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2026 को 'आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष' के रूप में मनाया जा रहा है, जो अधिक स्थिर और सुरक्षित भविष्य के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता की समयोचित याद दिलाता है।
भाषा अमित अविनाश
अविनाश
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