बिहार विधानसभा : मॉनसून सत्र के पहले दिन ही सरकार ने 10 विधेयक पेश किये
धीरज
- 20 Jul 2026, 10:58 PM
- Updated: 10:58 PM
पटना, 20 जुलाई (भाषा)बिहार सरकार ने विधानमंडल के मॉनसून सत्र के पहले दिन सोमवार को विधानसभा में उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि, कराधान, शहरी विकास और कारोबार सुगमता से जुड़े 10 संशोधन विधेयकों को पेश किया।
इन विधेयकों में विभिन्न कानूनों में संशोधन के साथ कुछ नए प्रावधान भी प्रस्तावित किए गए हैं।
सदन में पेश किए गए विधेयकों में बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक- 2026, बिहार नर्सेज पंजीकरण (संशोधन) विधेयक- 2026, बिहार चिकित्सा (संशोधन) विधेयक-2026, बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक- 2026 शामिल हैं।
इनके अलावा बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक,-2026, निबंधन अधिनियम, 1908 (बिहार संशोधन) विधेयक- 2026, भारतीय स्टाम्प (बिहार संशोधन) विधेयक- 2026, बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक- 2026, बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक- 2026, बिहार नगर विकास विधेयक- 2026 तथा 'बिहार व्यापार सुगमता विधेयक- 2026 भी सदन के पटल पर रखे गये।
सदन में इन विधेयकों पर चर्चा के बाद आगे की विधायी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सरकार के मुताबिक प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि प्रशासन, राजस्व व्यवस्था, शहरी विकास तथा निवेश-अनुकूल वातावरण को मजबूत बनाना है।
बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक- 2026 में भूमि के दाखिल-खारिज से संबंधित प्रत्येक याचिका, अपील के ज्ञापन और पुनरीक्षण आवेदन पर 200 रुपये शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है। विधेयक के अनुसार, वर्तमान में बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम के तहत दाखिल-खारिज से संबंधित याचिका, अपील अथवा पुनरीक्षण आवेदन पर न्यायालय शुल्क स्टाम्प लगाने का प्रावधान है, लेकिन अलग से कोई निर्धारित शुल्क नहीं है।
सरकार ने बताया कि विधेयक के कानून बनने के बाद विशेष अथवा सामान्य आदेश के माध्यम से समय-समय पर इस शुल्क में संशोधन किया जा सकेगा।
सरकार ने बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक-2026 भी सदन में पेश किया जो 2010 के कानू का स्थान लेगा।
विधानसभा में निबंधन अधिनियम, 1908 (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश किया, जिसके तहत भूमि के उपयोग, प्रकृति अथवा श्रेणी में बदलाव संबंधी दस्तावेज को धारा 17 के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकरण योग्य दस्तावेजों में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। सरकार ने इसके अलावा भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026 भी सदन में पेश किया।
बिहार में शहरी क्षेत्रों के सुनियोजित विस्तार, नागरिक सुविधाओं के विकास और ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की स्थापना के उद्देश्य से राज्य सरकार बिहार नगर विकास प्राधिकरण का गठन करेगी। इस संबंध में बिहार नगर विकास विधेयक- 2026 की प्रति सदस्यों के बीच वितरित की गई।
बिहार सरकार ने जुआ और ऑनलाइन सट्टेबाजी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026 पेश किया। इसमें मोबाइल फोन, कंप्यूटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में जुआ या सट्टेबाजी से संबंधित एप्लिकेशन रखने को भी अपराध बनाने का प्रावधान है। सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने वालों की बिना वारंट तलाशी और गिरफ्तारी का भी प्रस्ताव है।
सरकार के सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार ने पुराने सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 को समाप्त कर राज्यों से नया कानून बनाने को कहा था। इसी के अनुरूप बिहार सरकार ने राज्य में जुआ खेलने, जुआघर संचालित करने और ऑनलाइन सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए नया विधेयक तैयार किया है।
विधेयक के अनुसार, सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलते पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति की बिना वारंट तलाशी और गिरफ्तारी की जा सकेगी तथा उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर छह महीने तक के कारावास या तीन हजार से 10 हजार रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों हो सकता है।
विधेयक में किसी सार्वजनिक, व्यावसायिक स्थल या ऑनलाइन मंच का उपयोग जुआ संचालन के लिए करने पर पहली बार दोषी पाए जाने पर छह महीने से तीन वर्ष तक के कारावास और 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। दूसरी बार अपराध करने पर दो से पांच वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
भाषा कैलाश
धीरज
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2007 2258 पटना