अभिषेक बनर्जी के कार्यालय को गिराने के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश
प्रशांत
- 19 Jul 2026, 08:04 PM
- Updated: 08:04 PM
कोलकाता, 19 जुलाई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र कार्यालय को गिराने के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का रविवार को आदेश दिया।
न्यायमूर्ति राजा बासु चौधरी ने रविवार को विशेष सुनवाई करते हुए राज्य प्रशासन को निर्देश दिया कि अमतला स्थित इमारत में आगे कोई भी तोड़फोड़ न की जाए और यह रोक मामले की अगली सुनवाई या जुलाई के अंत तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगी।
न्यायमूर्ति चौधरी ने यह फैसला 'लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड' की याचिका पर सुनाया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक, अभिषेक 'लीप्स एंड बाउंड्स' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हैं।
अदालत ने अमतला में डायमंड हार्बर रोड स्थित पांच मंजिला इमारत को गिराने के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देते हुए कहा कि इसकी सुनवाई नियमित पीठ करेगी।
हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता की उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं और उपद्रवियों ने कार्यालय से दस्तावेज लूट लिए, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। उसने कहा कि याचिका में यह नहीं बताया गया है कि इस संबंध में पुलिस में कोई शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने अभिषेक के अमतला स्थित कार्यालय को तोड़ने की कार्रवाई शनिवार को शुरू की थी।
उन्होंने बताया कि प्रशासन का कहना है कि यह इमारत कथित तौर पर स्वीकृत भवन योजना के बिना और लागू नियमों का उल्लंघन करके बनाई गई थी।
अभिषेक ने इमारत को अपना निर्वाचन क्षेत्र कार्यालय बताते हुए शनिवार को दावा किया था कि अमतला स्थित उनका कार्यालय खरीदी गई जमीन पर कानूनी रूप से बनाया गया है और इसके लिए सभी जरूरी अनुमतियां भी ली गई थीं।
अभिषेक की ओर से पेश अधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत से कहा कि जिस शिकायत के आधार पर तोड़फोड़ का आदेश दिया गया था, उसकी प्रति उनके मुवक्किल को उपलब्ध नहीं कराई गई है।
दत्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता को शिकायत पर आपत्ति दर्ज कराने और अपना पक्ष रखने का अधिकार है, खासकर तब जब इमारत तोड़ने का आदेश जारी किया जा रहा हो।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता सुरोजीत नाथ मित्रा ने कहा कि याचिकाकर्ता को नोटिस जारी होने के मद्देनजर तोड़फोड़ की कार्रवाई की जानकारी थी।
उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में नाकाम रहा है कि इमारत का निर्माण दक्षिण 24 परगना जिला परिषद की ओर से जारी स्वीकृत भवन योजना के अनुसार किया गया था।
भाषा पारुल प्रशांत
प्रशांत
1907 2004 कोलकाता