डॉ. रेड्डी फाउंडेशन की मिट्टी जांच प्रयोगशाला में एक लाख नमूनों की जांच का लक्ष्य
अजय
- 19 Jul 2026, 02:56 PM
- Updated: 02:56 PM
श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश), 19 जुलाई (भाषा) दवा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कोष के प्रमुख लाभार्थियों में से एक और पारिवारिक ट्रस्ट 'डॉ. रेड्डी फाउंडेशन' अपनी हैदराबाद स्थित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला (सॉयल टेस्टिंग फैसिलिटी) के परिचालन का दायरा बढ़ा रहा है।
प्रयोगशाला ने आगामी रबी सीजन से पहले 75,000 से 1,00,000 नमूनों की जांच का लक्ष्य रखा है, जो इसके परिचालन के पहले पूरे साल के दौरान जांचे गए नमूनों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।
यह कदम मिट्टी की घटती गुणवत्ता और वर्ष 2015 में देशभर में शुरू की गई केंद्र सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के क्रियान्वयन में मौजूद खामियों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच की जा रही है।
फाउंडेशन में ग्रामीण आजीविका एवं जलवायु कार्रवाई निदेशक सुमन सरस्वतीबटला ने कहा, ''हालांकि सरकार की ओर से मिट्टी की जांच की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन समस्या का स्तर बहुत बड़ा है। इसलिए हमने अपने स्तर पर इस मुद्दे के समाधान का फैसला किया।''
सरस्वतीबटला ने बताया कि भरोसेमंद मिट्टी जांच समाधान तलाशने के लिए फाउंडेशन ने करीब सात साल तक प्रयास किए, जिसके बाद अपनी प्रयोगशाला स्थापित करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि फाउंडेशन ने कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), सीजीआईएआर संस्थानों और त्वरित मिट्टी जांच उपकरण उपलब्ध कराने वाली निजी कंपनियों से संपर्क किया, लेकिन कोई भी व्यवस्था उसकी जरूरतों के अनुरूप नहीं मिली।
उन्होंने कहा, ''यदि जांच में सटीकता है तो निरंतरता की समस्या है और यदि निरंतरता है तो सटीकता की समस्या है।''
उन्होंने कहा कि भरोसेमंद विश्लेषण के लिए जरूरी प्रयोगशाला सुविधाएं पर्याप्त नहीं थीं, जिससे बड़े स्तर पर मिट्टी के नमूनों की सही जांच संभव नहीं हो पा रही थी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 का एक अनुभव इस दिशा में बदलाव का कारण बना। फाउंडेशन ने जांच के लिए एक वैश्विक शोध संस्थान को 5,000 मिट्टी के नमूने भेजे थे, लेकिन उनकी रिपोर्ट मिलने में पूरा एक साल लग गया। तब तक दो फसल सत्र बीत चुके थे।
सरस्वतीबटला ने कहा, ''दो फसल सत्र खत्म हो गए और बात केवल 5,000 नमूनों की थी। यदि मुझे डिजिटल मिट्टी मानचित्र तैयार करना है तो 5,000 नमूने चार गांवों या एक प्रखंड के लिए पर्याप्त हैं। देश में इतने लाखों प्रखंड हैं, ऐसे में समाधान कहां है।''
संस्थागत स्तर पर अपेक्षित क्षमता और गति से समाधान नहीं मिलने के बाद फाउंडेशन ने अपनी प्रयोगशाला स्थापित करने का निर्णय लिया।
हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला जनवरी, 2025 में शुरू हुई। पहले वर्ष में फाउंडेशन ने अपनी मानक प्रक्रियाओं को परखते हुए 20,000 मिट्टी नमूनों की जांच की। इस वर्ष प्रयोगशाला देशभर से अब तक 40,000 से अधिक नमूनों का विश्लेषण कर चुकी है और अगले रबी सत्र से पहले 75,000 से एक लाख नमूनों की जांच का लक्ष्य रखा गया है।
सरस्वतीबटला ने बताया कि यह सुविधा केवल फाउंडेशन के अपने परियोजना क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। शोधकर्ता और सरकारी संस्थान भी इसकी सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला मिट्टी के तीन प्रमुख गुणों- भौतिक, रासायनिक और जैविक- की जांच करती है। इन सभी गुणों के लिए अलग-अलग समय अंतराल पर पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।
भाषा योगेश अजय
अजय
1907 1456 श्रीकाकुलम