परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक की विफलता से भाजपा की शर्मिंदगी अब भी बरकरार: कांग्रेस
माधव
- 18 Jul 2026, 09:04 PM
- Updated: 09:04 PM
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने शनिवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक की विफलता से भाजपा को जिस 'शर्मिंदगी' का सामना करना पड़ा उसका असर अब भी बरकरार है। इसके पहले दो संसदीय समितियों ने उन विधेयकों पर अपनी मसौदा रिपोर्टों को मंजूरी देने का काम टाल दिया था जिसे कांग्रेस ने 'विवादास्पद विधेयक' करार दिया था।
कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया तब आई जब 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025' पर गठित संयुक्त समिति ने प्रस्तावित कानून पर अपनी मसौदा रिपोर्ट को मंजूरी देने के लिए सोमवार को होने वाली बैठक रद्द कर दी।
इस विधेयक में भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव का प्रस्ताव है। इसके तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को खत्म करके केवल एक विनियामक आयोग बनाने की बात कही गई है।
इससे पहले एक और घटनाक्रम हुआ, जिसमें गंभीर आरोपों में हिरासत में लिए गए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने का प्रस्ताव करने वाले 130वें संशोधन विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त समिति ने अपनी मसौदा रिपोर्ट को मंजूरी देने का काम टाल दिया, जबकि उसकी पांच सिफारिशों को लेकर मतदान की प्रक्रिया चल रही थी।
'एक्स' पर एक पोस्ट में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ''संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक दो दिन पहले, दो बहुत विवादित विधेयकों पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट को मंज़ूरी देने का काम टाल दिया है। इनमें से एक के लिए संविधान में संशोधन की जरूरत है और दूसरा संविधान के दायरे से बाहर जाकर काम करने का स्पष्ट मामला है।''
उन्होंने कहा, ''17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में मोदी सरकार को जिस शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था, उसका साया केंद्रीय गृह मंत्री की डींगों, बड़े-बड़े दावों और आक्रामक बयानबाजी के बावजूद साफ तौर पर अब भी बरकरार है।''
एक सौ तीसवें संशोधन विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त समिति ने हाल ही में मसौदा रिपोर्ट पर अपनी पांच सिफारिशों से सदस्यों को अवगत कराया था।
इस विधेयक में प्रस्ताव था कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्र/राज्य के अन्य मंत्रियों को किसी ऐसे अपराध के लिए गिरफ्तार करके लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, जिसमें पाँच साल या उससे अधिक की सज़ा हो सकती है, तो उन्हें अपने पद से हटा दिया जाएगा।
लेकिन शुक्रवार को समिति ने इन सुझावों पर मतदान टालने का फैसला किया, ताकि संबंधित लोगों के साथ और अधिक बातचीत की जा सके।
एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने अपनी असहमति दर्ज कराई थी, लेकिन समिति द्वारा आखिरी समय में इसे मंजूरी देने का फैसला टालने के बाद उन्होंने अपना असहमति नोट वापस ले लिया।
भाषा संतोष माधव
माधव
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