दिल्ली रेस क्लब के लगभग दो-तिहाई घोड़े अनिश्चितता के बीच भेजे जा रहे हैं देश के अन्य रेस क्लब में
माधव
- 18 Jul 2026, 06:05 PM
- Updated: 06:05 PM
(वर्षा सागी)
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) करीब एक सदी पुराने दिल्ली रेस क्लब के भविष्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच यहां रखे गए ऊंची नस्ल एवं दौड़ के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित घोड़े धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजधानी छोड़ देश के अन्य रेस क्लब भेजे जा रहे हैं। कुछ महीने पहले तक यहां लगभग 272 घोड़े थे, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर करीब 98 रह गई है।
इन घोड़ों की कीमत उनकी नस्ल और घुड़दौड़ में प्रदर्शन के आधार पर तीन लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक होती है। इन्हें घुड़दौड़ के नजरिये से देश के सबसे बेहतरीन और सबसे महंगे घोड़ों में गिना जाता है।
सूत्रों ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि हर कुछ दिनों में विशेष घोड़ा-वाहन रेसकोर्स से निकलता है और इन बेशकीमती घोड़ों को देश के विभिन्न रेस क्लब में उनके नए ठिकानों तक पहुंचाता है।
घोड़ों का यह पलायन केंद्र सरकार द्वारा क्लब के कब्जे वाली सरकारी जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद तेज हुआ है।
भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) ने 13 मार्च को क्लब को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जमीन खाली करने का निर्देश दिया था। नोटिस में कहा गया था कि यह भूमि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यक है।
एक सूत्र ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''कुछ समय पहले तक यहां विशेष रूप से प्रशिक्षित ऊंची नस्ल के 272 घोड़े थे, लेकिन उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता के कारण आज केवल 98 घोड़े बचे हैं। आज ही हमने तीन घोड़ों को यहां से रवाना किया है। उनके मालिक उन्हें दूसरे रेस क्लब और राइडिंग स्कूल में भेज चुके हैं।''
सूत्रों के अनुसार, घोड़ों के मालिक अपने बेशकीमती घोड़ों को धीरे-धीरे पुणे, मुंबई, बेंगलुरु, मैसूर, हैदराबाद और कोलकाता के रेस क्लब में भेज रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जो घोड़े बूढ़े हो चुके हैं और अब दौड़ के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं हैं, उन्हें घुड़दौड़ स्कूल को बेच दिया गया है। कुछ घोड़ों को मेरठ स्थित एक रेस सुविधा केंद्र में भी भेजा गया है।
दिल्ली रेस क्लब द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, बेदखली की कार्रवाई, एलएंडडीओ के साथ चल रही बातचीत और अदालत में लंबित मामलों को देखते हुए अंतर-स्थल घुड़दौड़ अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई है।
एक सूत्र ने बताया, ''हर साल 30 अप्रैल के बाद से सितंबर तक भीषण गर्मी के कारण क्लब में दौड़ बंद रहती है। लेकिन इस बार अंतर-स्थल घुड़दौड़ और अन्य गतिविधियां भी स्थगित कर दी गई हैं।''
सूत्र ने कहा, ''कोई भी मालिक आखिरी समय तक इंतजार नहीं करना चाहता। जहां भी बेहतर दौड़ सुविधाएं उपलब्ध हैं, वे अपने घोड़ों को वहीं भेज रहे हैं।''
एक सूत्र ने बताया, ''ये ऊंची नस्ल के घोड़े केवल दौड़ के लिए तैयार किए जाते हैं। उनकी नस्ल और प्रदर्शन के आधार पर एक घोड़े की कीमत तीन लाख से 50 लाख रुपये तक हो सकती है।''
सामान्य घोड़ों के विपरीत, इन घोड़ों का पालन-पोषण और प्रशिक्षण केवल घुड़दौड़ के लिए किया जाता है। वे वर्षों तक बेहद सुनियोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का पालन करते हैं।
एक प्रशिक्षक ने कहा, ''इन घोड़ों को खिलाड़ियों जैसा माना जाता है। इनके व्यायाम, भोजन और चिकित्सा देखभाल की रोजाना बारीकी से निगरानी की जाती है।''
उन्होंने बताया कि ऐसे घोड़ों की हड्डियां काफी नाजुक होती हैं और प्रशिक्षण के दौरान मामूली फिसलन भी 'हेयरलाइन फ्रैक्चर' का कारण बन सकती है।
प्रशिक्षक ने कहा, ''ये दूसरे सामान्य घोड़ों की तरह साधारण चारा नहीं खा सकते। हर घोड़े को विशेष रूप से तैयार किया गया भोजन दिया जाता है, जिसमें आवश्यक पोषक तत्व और विटामिन शामिल होते हैं, ताकि वह दौड़ के लिए पूरी तरह उपयुक्त रहे।''
वहीं, कर्मचारियों ने बताया कि ऐसे एक घोड़े की देखभाल पर हर महीने कम से कम 40,000 रुपये खर्च होते हैं। घोड़े की उम्र, प्रशिक्षण और चिकित्सा संबंधी जरूरतों के अनुसार यह खर्च और भी बढ़ सकता है।
भाषा शफीक माधव
माधव
1807 1805 दिल्ली