उच्चतम न्यायालय ने 'महाप्रभु जगन्नाथ' फिल्म रथ यात्रा के बाद रिलीज करने की अनुमति दी
अविनाश
- 17 Jul 2026, 04:05 PM
- Updated: 04:05 PM
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एनिमेटिड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का उत्सव समाप्त होने के बाद देशभर में 28 जुलाई या उसके पश्चात रिलीज करने की अनुमति दे दी।
न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि यह एनिमेटिड फिल्म उस वेब सीरीज पर आधारित है, जिसे पहले ही यूट्यूब पर जारी किया जा चुका है। पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने फिल्म के प्रदर्शन के लिए प्रमाणपत्र जारी कर दिया है।
फिल्म के निर्माताओं ने ओडिशा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एले एनिमेशंस प्राइवेट लिमिटेड को फिल्म रिलीज करने से रोक दिया गया था। यह फिल्म आज सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली थी।
राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि ओडिशा और देश के अन्य हिस्सों में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा बृहस्पतिवार से शुरू हो चुकी है।
पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए फिल्म को 17 जुलाई को रिलीज करने का निर्देश देने से भी मना कर दिया।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने फिल्म निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत से कहा, ''रथ यात्रा समाप्त होने के बाद आप फिल्म रिलीज कर सकते हैं।''
कामत ने पीठ से मूल रूप से घोषित तारीख पर फिल्म की रिलीज की अनुमति देने का आग्रह करते हुए कहा कि इसी विषय पर आधारित वेब सीरीज दो वर्ष पहले यूट्यूब पर जारी की गई थी और उससे किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न नहीं हुई थी।
हालांकि, पीठ ने उनसे रथ यात्रा के उत्सव के दौरान फिल्म रिलीज नहीं करने को कहा।
कामत ने दलील दी कि फिल्म पर करोड़ों रुपये का निवेश किया गया है और सिनेमाघरों की बुकिंग पहले ही हो चुकी है। यदि रथ यात्रा के 10 दिनों के दौरान फिल्म रिलीज नहीं हो पाती है, तो निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने फिल्म को प्रमाणित किया है। यह बच्चों के लिए बनाई गई फिल्म है और बाल गणेश पर आधारित एनिमेटिड फिल्म की तरह पूरी तरह काल्पनिक है।
इसके बाद पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ फिल्म निर्माताओं द्वारा दायर याचिका का निस्तारण कर दिया।
ओडिशा उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के चित्रण को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर गहन न्यायिक समीक्षा आवश्यक है इसलिए, जब तक इन आपत्तियों की विस्तार से जांच नहीं हो जाती, तब तक फिल्म का प्रदर्शन नहीं किया जा सकता।
उच्च न्यायालय की पीठ ने यह अंतरिम आदेश अंगुल निवासी महेश कुमार साहू, पुरी के डॉ. प्रमोद कुमार आचार्य और निमापाड़ा के उमाशंकर आचार्य द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया था।
याचिका में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा फिल्म को दिए गए प्रमाणपत्र को रद्द करने और ओडिशा में फिल्म के सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने फिल्म में भगवान जगन्नाथ के बचपन, संवाद, साहसिक घटनाओं और युद्ध संबंधी दृश्यों को काल्पनिक रूप में दिखाए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह चित्रण स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण तथा श्री जगन्नाथ मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के विपरीत है।
भाषा
गोला अविनाश
अविनाश
1707 1605 दिल्ली