भविष्य के प्रौद्योगिकी-आधारित युद्ध में भी सीमावर्ती अवसंरचना अपरिहार्य रूप से अहम: राजनाथ
सुरेश
- 16 Jul 2026, 08:39 PM
- Updated: 08:39 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि भले ही युद्ध के बदलते स्वरूप से निपटने के लिए सशस्त्र बलों में आधुनिक हथियार और अन्य उपकरण शामिल किए जा रहे हैं, लेकिन भविष्य में भी बंदरगाह, सड़क और सुरंग जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे अपरिहार्य भूमिका निभाते रहेंगे।
सिंह ने यहां सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के रणनीतिक अवसंरचना सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भले ही युद्धकला की बदलती प्रकृति से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए रक्षा बलों में अत्याधुनिक हथियार और उपकरण शामिल किए जा रहे हैं, फिर भी बंदरगाह, हवाई अड्डे, सड़कें और सुरंगें भविष्य में अपरिहार्य भूमिका निभाती रहेंगी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यद्यपि युद्ध का परिणाम बहुत हद तक सैन्य शक्ति, सटीक क्षमताओं और आधुनिक प्रौद्योगिकियों द्वारा निर्धारित होता है, फिर भी बुनियादी ढांचा सैन्य अभियानों को सक्षम बनाने के लिए अत्यधिक महत्व रखता है।
'सीमा सड़क संगठन' (बीआरओ) द्वारा आयोजित 'रणनीतिक अवसंरचना सम्मेलन' में अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यद्यपि युद्ध का नतीजा मुख्य रूप से सैन्य ताकत, सटीक हमले की क्षमता और आधुनिक तकनीकों से तय होता है, लेकिन सैन्य अभियानों को संभव बनाने के लिए बुनियादी ढांचा बहुत जरूरी है।
सिंह ने कहा, ''कभी-कभी युद्ध का पहला मोर्चा सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर होता है, जो हमारे सैनिकों को अग्रिम मोर्चे तक ले जाती है। इसलिए, जो व्यक्ति वह सड़क बनाता है, वह भी राष्ट्रीय सुरक्षा का उतना ही महत्वपूर्ण रक्षक होता है, जितना कि सीमा पर तैनात सैनिक।''
उन्होंने मजबूत बुनियादी ढांचा बनाने के लिए खास तकनीकों को अपनाने और विश्व-स्तरीय बुनियादी ढांचा बनाने, राष्ट्रीय सुरक्षा को लगातार मज़बूत करने तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुसार 2047 तक भारत को 'विकसित भारत' बनाने के सरकार के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए बीआरओ की सराहना की।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य में प्रौद्योगिकी-आधारित युद्ध में भी सीमावर्ती बुनियादी ढांचा अपरिहार्य रूप से अहम बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी सभ्यता के विकास का एक जरूरी हिस्सा है और सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाला कोई भी व्यक्ति खुद को मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस न करे।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नवाचार, अनुसंधान और काम को बेहतरीन ढंग से पूरा करना 'भविष्योन्मुखी रणनीतिक अवसंरचना' के लिए जरूरी है।
सिंह ने कहा, ''भले ही युद्ध के बदलते स्वरूप से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए रक्षा बलों में अत्याधुनिक हथियार और अन्य उपकरण शामिल किए जा रहे हों, फिर भी भविष्य में बंदरगाह, हवाई पट्टियां, सड़कें और सुरंगें अहम भूमिका निभाती रहेंगी।''
बुधवार को शुरू हुए दो दिन के इस सम्मेलन में कई अहम विषयों पर चर्चा हुई, जैसे-नई प्रौद्योगिकी, नवोन्मेषी इंजीनियरिंग समाधान, उत्पादकता बढ़ाने के लिए नियोजन, परियोजना निगरानी और काम पूरा करने में डिजिटल बदलाव, टिकाऊ निर्माण के तरीके और भारत के सीमावर्ती इलाकों में रणनीतिक अवसंरचना के विकास को तेज गति प्रदान करने के लिए अपनाए जाने वाले सबसे अच्छे तरीके।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता, अवसंरचना विशेषज्ञ, बीआरओ के अधिकारी, उद्योग जगत की हस्तियां और प्रौद्योगिकी साझेदार एक साथ आए, ताकि रणनीतिक अवसंरचना के विकास के भविष्य पर मिलकर चर्चा कर सकें।
सिंह ने बताया कि पिछले साढ़े छह दशकों में, बीआरओ ने खुद को सिर्फ सड़क बनाने वाली एजेंसी की बजाय रणनीतिक अवसंरचना तैयार करने वाले दुनिया के सबसे सम्मानित संगठनों में से एक के रूप में पहचान बनाई है।
उन्होंने अटल सुरंग, उमलिंग ला दर्रा और सेला सुरंग जैसी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि ये बीआरओ की क्षमता और कड़ी मेहनत के 'जीवंत प्रमाण' हैं। उन्होंने कहा कि इसके समर्पित कर्मचारियों ने बार-बार साबित किया है कि देश सेवा की भावना के साथ, सबसे मुश्किल हालात में भी किसी भी चुनौती से पार पाया जा सकता है।
बीआरओ को नई प्रौद्योगिकी अपनाने में सबसे आगे रहने वाला संगठन बताते हुए, सिंह ने सुरंग बनाने की प्रौद्योगिकी का खास जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस प्रौद्योगिकी ने शहरों में मेट्रो बनाने से लेकर पहाड़ी इलाकों में राजमार्ग बनाने तक, हर क्षेत्र में क्रांति ला दी है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे मुश्किल इलाकों में बीआरओ जिस तेजी से सड़कें और राजमार्ग बनाता है, वह 'अभूतपूर्व' है। उन्होंने इसे इंसानी संकल्प और आधुनिक प्रौद्योगिकी की मिली-जुली ताकत का नतीजा बताया।
इस मौके पर बीआरओ के निदेशक जनरल लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने जोर देकर कहा कि रणनीतिक क्षमता का पैमाना 'अब सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि हम क्या बनाते हैं; बल्कि यह इस बात से तय होता है कि हम कितनी समझदारी से योजना बनाते हैं, कितनी तेजी से काम पूरा करते हैं, कितनी अच्छी तरह निगरानी करते हैं और अवसंरचना संपत्तियों का रखरखाव कितना टिकाऊ तरीके से करते हैं।''
रक्षा मंत्री ने बीआरओ की अलग-अलग परियोजना के लिए पुरस्कार भी प्रदान किए। मंत्रालय ने बताया कि उन्होंने परियोजना प्रबंधन और भर्ती के लिए दो डिजिटल मंच की भी शुरुआत की, जो बीआरओ के डिजिटल बदलाव और संगठन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और अहम कदम है।
सिंह ने बीआरओ के तीन खास प्रकाशन, 'पथ प्रदर्शक', 'ऊंची सड़कें' और 'पथ विकास' जारी किए, जिनमें संगठन की उपलब्धियों, इंजीनियरिंग नवाचार, बेहतरीन तौर-तरीकों और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण का जिक्र किया गया है।
भाषा संतोष सुरेश
सुरेश
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