आप की गुजरात इकाई के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक के खिलाफ याचिका पर न्यायालय ने नोटिस जारी किया
दिलीप
- 14 Jul 2026, 07:23 PM
- Updated: 07:23 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने आम आदमी पार्टी (आप) की गुजरात इकाई की उस याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा, जिसमें उसके सोशल मीडिया अकाउंट और वेब पोर्टल को निलंबित किए जाने को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने पार्टी की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका और मुख्य याचिका पर नोटिस जारी किया।
आप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा कि गुजरात में उनकी पार्टी विपक्ष में है और उसके सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक कर दिए गए हैं।
उन्होंने अंतरिम राहत के लिए हस्तक्षेप याचिका और पार्टी की मुख्य याचिका पर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया।
पीठ उन मामलों की सुनवाई कर रही थी, जिनमें उपयोगकर्ता को नोटिस दिए बिना सोशल मीडिया अकाउंट और पोस्ट को ब्लॉक करने की कार्रवाई को चुनौती दी गई है। पीठ ने सभी हस्तक्षेप याचिकाओं को स्वीकार करते हुए सभी मामलों में नोटिस जारी किया।
पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई के लिए जल्द ही एक तारीख तय की जाएगी, जिसमें गैर-सरकारी संगठन सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर द्वारा दायर मुख्य जनहित याचिका भी शामिल है।
पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से कहा कि वह अदालत के लिए एक सुविधा नोट तैयार करें, जिसमें यह बताया जाए कि किस पक्ष को किस कार्रवाई और किस प्रावधान से शिकायत है।
दवे ने कहा कि नोट दाखिल होने के बाद अदालत यह देख सकती है कि क्या कोई मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और जिन मामलों में समानता नहीं है, उन्हें अलग किया जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने आठ मई को आप की याचिका को संबंधित मामले के साथ जोड़ दिया था, हालांकि उस समय नोटिस जारी नहीं किया गया था।
आप ने अपनी याचिका में कहा है कि अधिकारियों द्वारा लागू की गई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) इस मामले में लागू नहीं होती, क्योंकि यह सोशल मीडिया कंपनियों को दिये गए संरक्षण से संबंधित प्रावधान है।
याचिका में पार्टी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक और निलंबित किए जाने के कानूनी आधार को चुनौती दी है। इसमें यह घोषित करने का अनुरोध किया गया है कि सूचना को ब्लॉक करने का निर्देश देने के लिए अधिकारियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत अधिकार प्राप्त नहीं है।
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि इस प्रावधान के तहत जारी सभी परिणामी निर्देशों, नियमों और अधिसूचनाओं को, जहां तक वे सूचना ब्लॉक करने से संबंधित हैं, अमान्य घोषित किया जाए।
आप ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा उसके सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक या निलंबित करने के लिए कथित रूप से जारी निर्देशों को रद्द करने का अनुरोध भी किया है।
शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष तीन मार्च को इस मुद्दे पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी कि सूचना के निर्माता या मूल स्रोत को सुनवाई का अवसर दिए बिना सोशल मीडिया अकाउंट या सामग्री को ब्लॉक किया जा सकता है या नहीं।
याचिकाकर्ता सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर ने दलील दी है कि सूचना के ''मूल स्रोत'' को कोई नोटिस नहीं दिया गया और केवल एक्स जैसे मंचों को नोटिस भेजा गया।
भाषा अमित दिलीप
दिलीप
1407 1923 दिल्ली