उच्च शिक्षा विधेयक से एचईआई की स्वायत्तता में शायद ही कोई सुधार हो : थिंकटैंक
नरेश
- 14 Jul 2026, 04:57 PM
- Updated: 04:57 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 से उच्च-शिक्षा संस्थानों (एचईआई) की स्वायत्तता में कोई खास सुधार होने की संभावना नहीं है। एक विधायी थिंकटैंक का हालिया विश्लेषण तो कुछ यही कहता है।
विश्लेषण के मुताबिक, विधेयक में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं किया गया है।
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में पेश किया गया था, जिसके बाद इसे संसद की एक संयुक्त समिति के विचारार्थ भेज दिया गया था।
'पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च' के विश्लेषण में कहा गया है, "इस विधेयक के प्रावधानों से उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता में शायद ही कोई खास सुधार हो। कुछ मामलों में उच्च शिक्षण संस्थानों को पहले से हासिल स्वायत्तता वापस भी ली जा सकती है। इसमें कुछ मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों को अपने संबंद्ध प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए दी गई स्वायत्तता भी शामिल है।"
भारत में व्यावसायिक शिक्षा का विनियमन फिलहाल 16 वैधानिक व्यावसायिक परिषद करती हैं। ये संस्थाएं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए मानक तय करती हैं और उनमें दाखिले के लिए परीक्षाएं आयोजित करती हैं। वे उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए बुनियादी ढांचा, पाठ्यचर्या, स्टाफ की योग्यता और अकादमिक गुणवत्ता से जुड़े नियम भी तय कर सकती हैं।
विश्लेषण में कहा गया है, "यह विधेयक सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पर एक समान लागू नहीं होता है। तकनीकी शिक्षा (जो अभी एआईसीटीई अधिनियम, 1987 के तहत विनियमित होती है) और शिक्षक शिक्षा (जो एनसीटीई अधिनियम, 1993 के तहत विनियमित होती है) को आयोग के दायरे में लाया जा रहा है और मौजूदा नियामकों को खत्म किया जा रहा है।"
इसमें कहा गया है, "वास्तुकला की पढ़ाई कराने वाले संस्थानों को आयोग विनियमित करेगा। हालांकि, वास्तुकला परिषद एक व्यावसायिक परिषद के तौर पर काम करती रहेगी और आयोग की परिषदों में उसका प्रतिनिधित्व भी होगा।"
विश्लेषण के मुताबिक, "इस विधेयक के तहत केंद्र सरकार व्यावसायिक परिषद को अधिसूचित भी कर सकती है। व्यावसायिक परिषदों के दायरे में आने वाले संस्थान इस विधेयक के दायरे में आ जाएंगे। हालांकि, इसमें विधि, चिकित्सा और पशु चिकित्सा कार्यक्रम समेत कुछ व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को साफ तौर पर छूट दी गई है।"
फिलहाल संसद की संयुक्त समिति इस विधेयक की जांच कर रही है और आगामी मानसून सत्र के दौरान इस पर चर्चा और इसे पारित करने की प्रक्रिया होगी।
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