ममता का निर्वाचन आयोग से आग्रह: ऋतब्रत को और समय न दिया जाए
वैभव
- 13 Jul 2026, 10:02 PM
- Updated: 10:02 PM
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गुट के नेता ऋतबत बनर्जी को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनात्मक चुनावों से जुड़े दावों पर जवाब देने के लिए और समय नहीं दिया जाना चाहिए।
पार्टी के भीतर जारी विवाद दो जुलाई को उस समय और गहरा गया था, जब ऋतब्रत के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को ''असली'' अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) बताते हुए निर्वाचन आयोग का रुख किया।
इस गुट ने कहा था कि उसने 22 जून को आयोजित विशेष अधिवेशन के बाद आयोग को इसकी जानकारी दी थी और संगठन में किए गए कथित बदलावों को मान्यता देने का अनुरोध किया था।
इस दावे के बाद निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों को पत्र भेजकर अपना-अपना जवाब दाखिल करने को कहा था।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने छह जुलाई को अपना जवाब दाखिल कर दिया, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के गुट को जवाब दाखिल करने के लिए 10 जुलाई की शाम साढ़े पांच बजे तक का अतिरिक्त समय दिया गया।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 12 जुलाई को निर्वाचन आयोग को लिखे पत्र में कहा, ''10 जुलाई बीत जाने और उसके बाद करीब दो दिन गुजर जाने के बावजूद ऋतब्रत बनर्जी की ओर से इस संबंध में कोई जवाब हमें नहीं भेजा गया है।''
तृणमूल के सूत्रों के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने दोनों पक्षों से कहा था कि वे अपने-अपने जवाब की जानकारी एक-दूसरे को भी दें।
ममता बनर्जी ने पत्र में कहा, ''इसलिए यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित इस पूर्व शर्त के बावजूद हमें कोई सूचना नहीं दी गई है, जिससे यह माना जा सकता है कि आयोग को भी निर्धारित विस्तारित अवधि के भीतर ऐसा कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।''
उन्होंने कहा कि ऋतब्रत बनर्जी को बाद में जवाब दाखिल करने की जो ''रियायत'' दी गई, वैसी उन्हें नहीं दी गई थी और उन्हें दो जुलाई, 2026 के पत्र का जवाब देने के लिए ''व्यावहारिक रूप से केवल ढाई कार्य दिवस'' दिए गए थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ''10 जुलाई के बाद 48 घंटे और बीत जाने के बावजूद आपका कार्यालय पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है, जिससे ऋतब्रत बनर्जी को और अवसर मिल रहा है तथा यह उनके दुर्भावनापूर्ण मकसद के प्रति आपके झुकाव को दर्शाता है।''
ममता बनर्जी ने कहा, ''इसलिए, मैं आग्रह करती हूं कि मेरी ओर से दाखिल जवाब पर शीघ्र विचार किया जाए तथा ऋतब्रत बनर्जी को कोई और समय नहीं दिया जाए।''
इस बीच, तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने निर्वाचन आयोग पर बागी गुट को "विशेष रियायत" देने का आरोप लगाया और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "निर्वाचन आयोग से अपेक्षा की जाती है कि वह एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था के रूप में कार्य करे और सभी पक्षों को समान अवसर प्रदान करे। जब दूसरा पक्ष निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपनी औपचारिकताएं पूरी करने में विफल रहा, तब उसे अतिरिक्त समय और विशेष रियायत क्यों दी गई, जबकि हमने तय समय के भीतर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली थीं?"
मोइत्रा ने यह भी आरोप लगाया कि बीते दो जुलाई को प्रतिद्वंद्वी गुट की ओर से दिए गए आवेदन पर निर्वाचन आयोग ने असामान्य रूप से तेजी से कार्रवाई की।
उन्होंने कहा, "महज तीन से चार घंटे के भीतर आयोग ने हमें पत्र भेज दिया। यह अभूतपूर्व है, क्योंकि सामान्यतः आयोग को प्रतिक्रिया देने में कहीं अधिक समय लगता है।"
उन्होंने कहा, "रेफरी (निर्णायक) पक्षपातपूर्ण नहीं हो सकता। हमारा मानना है कि आयोग को अपनी निष्पक्षता साबित करनी चाहिए और निर्धारित समयसीमा के भीतर जमा किए गए जवाब के आधार पर ही अपनी जांच पूरी करनी चाहिए।"
इससे पहले, निर्वाचन आयोग को दिए अपने जवाब में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने बागी गुट के दावे को खारिज करते हुए कहा था कि पार्टी के संविधान के अनुसार संगठन की विभिन्न समितियां वर्ष 2027 तक वैध हैं।
पार्टी ने कहा था कि अंतिम संगठनात्मक चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे और प्रतिद्वंद्वी गुट का यह दावा तथ्यात्मक और कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है कि समितियों का अस्तित्व वर्ष 2025 में समाप्त हो गया।
भाषा हक अविनाश वैभव
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