बाढ़, भूस्खलन से अरुणाचल के कई जिलों में आम जनजीवन प्रभावित
अविनाश
- 13 Jul 2026, 08:20 PM
- Updated: 08:20 PM
ईटानगर, 13 जुलाई (भाषा) अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से सोमवार को कई जिलों में आम जनजीवन प्रभावित हुआ।
एक आधिकारिक बयान में बताया गया है कि सड़क संपर्क बाधित होने और सार्वजनिक ढांचे को नुकसान पहुंचने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बयान के मुताबिक, राज्य में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में सात लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 29 अन्य घायल हुए हैं। इसमें कहा गया है कि 26 जिलों के 425 गांवों में 97,182 लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
बयान के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन से कृषि और सार्वजनिक ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। इसमें कहा गया है कि कुल 541.75 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जबकि करीब 1,010 हेक्टेयर वन क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा है।
बयान में कहा गया है कि राज्य में 150 सड़कों, 19 पुलों, 21 पुलिया, 221 जलापूर्ति प्रणालियों, 58 सरकारी भवनों, 156 बिजली लाइनों, 224 बिजली खंभों, 10 पनबिजली परियोजनाओं, दो अस्पतालों और तीन स्कूलों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा राज्यभर में सैकड़ों मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) ने बताया कि सोमवार तड़के ऊपरी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण कुमे नदी में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे कुरुंग कुमे जिले के परसी-पारलो सर्किल और डामिन उपखंड में भारी नुकसान हुआ।
एसईओसी के मुताबिक, डामिन उपखंड में हुरी और डामिन को जोड़ने वाला पुल बह गया, जिससे सड़क संपर्क टूट गया। वहीं, परसी-पारलो सर्किल में एक आंगनवाड़ी केंद्र पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि एक निरीक्षण बंगले, चावल मिल, गिरजाघर, प्रार्थना-स्थलों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी काफी नुकसान पहुंचा और पगाम गांव को जोड़ने वाला पुल बह गया।
बाढ़ की वजह से इलाके के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान सेंट थॉमस स्कूल को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। इसमें कहा गया कि पूरा स्कूल परिसर जलमग्न हो गया, जिससे इमारतों, कक्षाओं, शिक्षण सामग्री, फर्नीचर, उपकरणों और शिक्षकों के आवास को क्षति पहुंची और शैक्षणिक गतिविधियां रोकनी पड़ीं।
अचानक आई बाढ़ से परिवहन व्यवस्था, सार्वजनिक ढांचे और आवासीय संपत्तियों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। जिला प्रशासन नुकसान का आकलन करने और राहत कार्यों के लिए अर्धसैनिक बलों, पुलिस तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है।
अतिरिक्त उपायुक्त नबम ताजिक ने बताया कि हुरी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल है, जहां 66 मीटर लंबा एक पुल बह गया।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन पुल की मरम्मत के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के साथ मिलकर काम कर रहा है और इस कार्य में लगभग दो हफ्ते लगने की उम्मीद है।
अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ में लुक्संग घाटी पुल और हाल में शुरू किया गया हुतार घाटी पुल भी बह गए। ये दोनों पुल बीआरओ के तहत आते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि कुमेय और तमिन नदियों पर बने कई 'वायर रोप सस्पेंशन ब्रिज' (डब्ल्यूआरएसबी) या तो क्षतिग्रस्त हो गए या बह गए जिससे कई गांवों से संपर्क बाधित हो गया।
अधिकारियों के अनुसार, पक्के केसांग जिले में सोमवार को पकरो गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-13 पर भूस्खलन के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया। उन्होंने बताया कि प्रभावित हिस्से को दुरुस्त करने में दो से तीन दिन लग सकते हैं।
जिला प्रशासन ने अगले आदेश तक यात्रियों को ईटानगर-सेप्पा मार्ग पर यात्रा नहीं करने की सलाह दी।
अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम कामेंग जिले में भारी बारिश के कारण सेला सुरंग की ओर जाने वाली सड़क का एक हिस्सा बह गया। उन्होंने यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग के रूप में पुराने सेला मार्ग का इस्तेमाल करने की सलाह दी।
अधिकारियों ने बताया कि पापुम पारे जिले में शिव मंदिर के पास भूस्खलन के बाद पोतिन-किमिन मार्ग रविवार शाम से बंद है।
उन्होंने बताया कि लोअर दिबांग घाटी में डम्बुक, कोरोनु और रोइंग सर्किल, जबकि वेस्ट सियांग में दारक, काम्बा और योमचा बाढ़ की चपेट में हैं।
अधिकारियों के मुताबिक ईटानगर कैपिटल रीजन (आईसीआर) में नहारलगुन सर्कल के अंतर्गत सांगलो पुटुंग-2 में भूस्खलन की खबर मिली है।
भाषा पारुल अविनाश
अविनाश
1307 2020 ईटानगर