पश्चिम बंगाल में राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा के तीन उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया
दिलीप
- 13 Jul 2026, 04:30 PM
- Updated: 04:30 PM
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 13 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन उम्मीदवारों सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक ने सोमवार को पश्चिम बंगाल से राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। अधिकारियों ने यह जानकारी।
इन सीटों के लिए मतदान 24 जुलाई को होगा।
अधिकारियों के अनुसार, तीनों नेताओं ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपने नामांकन पत्र जमा किए।
नामांकन दाखिल करने से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के साथ विधानसभा स्थित अपने कक्ष में तीनों उम्मीदवारों के साथ बैठक की।
अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद तीनों उम्मीदवारों ने विधानसभा में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपने नामांकन पत्र दाखिल किए।
ये तीनों राज्यसभा सीटें सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने तथा तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के बाद रिक्त हुई थीं। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। अब वे करीब एक महीने बाद भाजपा के टिकट पर दोबारा संसद पहुंचने के लिए तैयार हैं।
तीनों नेता नौ जुलाई को भाजपा में शामिल हुए थे और कुछ ही घंटों के भीतर पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।
विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद यह पहला बड़ा अवसर है, जब तृणमूल के पूर्व नेताओं को पार्टी में शामिल किया गया है। इसे इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को भाजपा में शामिल करने पर लगी अनौपचारिक रोक उन नेताओं पर लागू नहीं होगी, जिन्हें पार्टी राजनीतिक रूप से विश्वसनीय और भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त मानती है।
नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में सुष्मिता देव ने उन पर भरोसा जताने के लिए भाजपा नेतृत्व और पार्टी के विधायकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भाजपा में उन्हें ''परिवार जैसा'' अपनापन मिला है।
उन्होंने बताया कि शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें राज्यसभा में सक्रिय रूप से बहसों में भाग लेने और पार्टी के विधायकों के साथ समन्वय बनाकर काम करने की सलाह दी है।
देव ने कहा कि उनका जन्म भले ही असम के सिलचर में हुआ हो, लेकिन वह पश्चिम बंगाल के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा, ''मैं पहले भी संसद में बंगाल के मुद्दे उठाती रही हूं और आगे भी राज्य के हितों के लिए काम करती रहूंगी।''
अपनी पूर्व पार्टी से तुलना करते हुए देव ने कहा कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के कामकाज के तरीके में काफी बड़ा अंतर है।
निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार, राज्यसभा की तीनों रिक्त सीटों के लिए अलग-अलग चुनाव होंगे और प्रत्येक सीट को स्वतंत्र चुनाव माना जाएगा। हालांकि तीनों उपचुनाव एक ही कार्यक्रम के तहत कराए जाएंगे।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 207 विधायक हैं। ऐसे में पार्टी प्रत्येक सीट पर अपने दम पर जीत हासिल करने की स्थिति में है।
तृणमूल के पूर्व नेताओं को भाजपा में शामिल किए जाने को लेकर पूछे गए सवालों पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भट्टाचार्य ने इस आरोप को खारिज कर दिया कि पार्टी का ''तृणमूलीकरण'' हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पार्टी का कद किसी भी नेता से बड़ा होता है और ''देश पार्टी से भी बड़ा है।'' उन्होंने कहा कि तृणमूल के तीन पूर्व राज्यसभा सदस्यों को भाजपा में शामिल करने और पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनाने का फैसला राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिया गया है।
वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने भी इस फैसले का बचाव किया।
उन्होंने कहा, ''कहीं भी यह नहीं लिखा है कि भाजपा दूसरे दलों की प्रतिभाओं को अपने साथ नहीं जोड़ सकती।'' उन्होंने यह भी कहा कि शुभेंदु अधिकारी सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता पहले तृणमूल कांग्रेस छोड़कर ही पार्टी में शामिल हुए थे।
भाषा
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