विमान किराये से जुड़ी याचिका: न्यायालय ने केंद्र से दो हफ्ते के भीतर नियम प्रस्तुत करने को कहा
नेत्रपाल
- 13 Jul 2026, 04:19 PM
- Updated: 04:19 PM
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए गए नियम दो हफ्ते के अंदर उसके समक्ष प्रस्तुत करे।
इस अधिनियम का मकसद भारत के विमानन क्षेत्र का आधुनिकीकरण करना है।
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि नियम सीलबंद लिफाफे में सौंपे जाएं, भले ही उन्हें संसद के समक्ष रखा गया हो या नहीं।
न्यायालय ने यह आदेश सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिका में, नागर विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत एवं स्वतंत्र विनियामक की स्थापना की मांग की गई है।
इसके अलावा, भारत में निजी एयरलाइन कंपनियों द्वारा हवाई किराये और अतिरिक्त शुल्कों में की जाने वाली ''अप्रत्याशित बढ़ोतरी'' पर नियंत्रण के लिए नियामक दिशानिर्देश जारी करने की भी मांग की गई है।
केंद्र की ओर से पेश हुए वकील ने पीठ को बताया कि नियमों का मसौदा तैयार है और उनका अनुवाद किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन नियमों को संसद के समक्ष पेश किया जाना है।
पीठ ने कहा, ''हम प्रतिवादियों को बनाए गए नियमों को दो हफ्ते के अंदर इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश देते हैं, चाहे उन्हें संसद के सदनों के समक्ष पेश किया गया हो या नहीं।''
लक्ष्मी नारायण की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने कहा कि जब तक नए नियम लागू नहीं हो जाते, पुराने नियम ही लागू रहेंगे।
''अत्यधिक विमान किराये'' की ओर इशारा करते हुए श्रीवास्तव ने कहा, ''इसका समाधान यह है कि न्यायालय को एक मजबूत और असरदार विनियामक व्यवस्था बनाने पर विचार करना चाहिए, जो स्वतंत्र हो।''
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन अगस्त की तारीख तय की।
इससे पहले, 15 मई को याचिका पर सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा था कि हवाई किराये को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए। न्यायालय ने केंद्र से यात्रियों को राहत देने को भी कहा था।
उस समय, केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया था कि 2024 का नया कानून जनवरी 2025 में लागू हो गया था और उससे जुड़े नियम तैयार किए जा रहे हैं।
पिछले साल 17 नवंबर को, न्यायालय ने केंद्र और अन्य से लक्ष्मी नारायणन की याचिका पर जवाब मांगा था। याचिका में एक मजबूत और स्वतंत्र विनियामक की स्थापना का अनुरोध किया है, जो नागर विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
केंद्र सरकार ने 23 फरवरी को न्यायालय को बताया था कि नागर विमानन मंत्रालय याचिका में उठाए गए मुद्दों पर तत्परता से विचार कर रहा है।
याचिका में दावा किया गया है कि सभी निजी एयरलाइन ने बिना किसी औचित्य के 'इकोनॉमी' श्रेणी के यात्रियों के लिए मुफ्त 'चेक-इन' सामान की सीमा को 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किग्रा कर दिया है।
इसमें यह भी दावा किया गया कि वर्तमान में किसी भी प्राधिकरण के पास हवाई किराये या अतिरिक्त शुल्क की समीक्षा करने या उनकी सीमा तय करने की शक्ति नहीं है।
भाषा सुभाष नेत्रपाल
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